विज्ञान के चमत्कार
विज्ञान के चमत्कार — अध्ययन नोट्स
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बिरजू महाराज से साक्षात्कार
व्याख्याबिरजू महाराज से साक्षात्कार
इस अनुभाग में कथक नृत्य के महान कलाकार पद्मविभूषण श्री बिरजू महाराज का परिचय और उनके जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा प्रस्तुत की गई है। बिरजू महाराज का बचपन आर्थिक कठिनाइयों से भरा था, जब उनके पिता का निधन हो गया तो परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। उनके परिवार में कथक नृत्य की परंपरा थी, जिसके कारण उन्होंने बचपन से ही कथक सीखना शुरू कर दिया था। गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध को दर्शाने वाली गंडा बाँधने की परंपरा में उन्होंने बदलाव किया और शिष्य की लगन और भेंट की सामर्थ्य को परखना आवश्यक माना। बिरजू महाराज ने बताया कि नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ आवश्यक है क्योंकि संगीत में लय होती है जो नृत्य को सुंदरता और संतुलन प्रदान करती है। उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसमें नई भाव-भंगिमाएँ और प्रस्तुतिकरण के तरीके जोड़े। बिरजू महाराज ने शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य के बीच के अंतर को स्पष्ट किया और कहा कि लोक नृत्य सामूहिक होता है जबकि शास्त्रीय नृत्य में एक नर्तक अकेला होता है। उन्होंने बच्चों को संगीत, नृत्य सीखने की सलाह दी और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की रुचि को समझें और उन्हें कला के क्षेत्र में प्रोत्साहित करें। इस साक्षात्कार के माध्यम से हमें नृत्य की गहराई, परंपरा और कलाकार की मेहनत का बोध होता है। **Table on page 10 (7×2)** | शब्द | संदर्भ या अवधारणा | | --- | --- | | 1. कर्नाटक संगीत शैली | 1. भारत की प्राचीन गायन-वादन गीत-नृत्य अभिनय परंपरा का अभिन्न अंग है। इसमें शब्दों की अपेक्षा सुरों का महत्व होता है। इसमें नियमों की प्रधानता होती है। | | 2. घराना | 2. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है। इसमें स्वर शैली की प्रधानता होती है। जल तरंगम, वीणा, मृदंग, मंडोलिन वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। | | 3. शास्त्रीय संगीत | 3. हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक है, यह कान में सोने या चाँदी का तार पहनाने से संबंधित है। | | 4. हिंदुस्तानी संगीत शैली | 4. हिंदुस्तानी संगीत में कलाकारों का एक समुदाय या कुटुंब, जो संगीत नृत्य की विशिष्ट शैली साझा करते हैं। संगीत या नृत्य की परंपरा, जिसमें सिद्धांत और शैली पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण के द्वारा आगे बढ़ती है। | | 5. कनछेदन | 5. किसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य। लोक नृत्य, क्षेत्र विशेष की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं। ये विशेष रूप से फसल कटाई, उत्सवों आदि के अवसर पर किए जाते हैं। | | 6. लोक नृत्य | 6. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है। तबला, सारंगी, सितार, संतूर वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। इसके प्रमुख रागों की संख्या छह है। | **Table on page 15 (7×6)** | ती | झ | रू | ल | भ | ति | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | न | च | प | क्षमी | क | ल | | म | ल | क | ह | र | वा | | ल | इ | झू | म | रा | ड़ा | | दी | प | चं | दी | दा | त | | ड़ | च | क | र | द | ढ़ | | ए | म | ल | घ | रा | क |
- बिरजू महाराज का बचपन आर्थिक संघर्षों से भरा था।
- उन्होंने कथक नृत्य अपने परिवार से विरासत में सीखा।
- गुरु-शिष्य के संबंध में गंडा बाँधने की परंपरा में उन्होंने बदलाव किया।
- संगीत की समझ नृत्य सीखने के लिए आवश्यक है।
- लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में भिन्नता होती है।
- बच्चों को कला सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
- 📌 कथक: उत्तर भारत का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूप।
- 📌 गंडा: गुरु और शिष्य के बीच बंधन का प्रतीक ताबीज़।
- 📌 लय: संगीत और नृत्य में ताल और समय का संतुलन।
कथक की परंपरा और घराने
व्याख्याकथक की परंपरा और घराने
इस भाग में कथक नृत्य की उत्पत्ति, उसकी प्राचीनता और विभिन्न घरानों का विकास बताया गया है। कथक का नाम 'कथिक' से लिया गया है, जो कथावाचक होते थे और महाकाव्यों की कहानियाँ नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करते थे। कथक की शुरुआत मंदिरों में कथा कहने के रूप में हुई थी। लखनऊ, जयपुर, बनारस और रायगढ़ के घराने कथक के प्रमुख घराने हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट शैली और भाव-भंगिमाएँ हैं। कथक में लय, भाव और प्रस्तुतीकरण का विशेष महत्व है। बिरजू महाराज ने बताया कि उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसमें नई भाव-भंगिमाएँ और आधुनिक कवियों की रचनाएँ भी जोड़ी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कथक में गर्दन और ऊँगलियों की हल्की-फुल्की गति का विशेष महत्व है। इस प्रकार कथक नृत्य एक जीवंत कला है जो समय के साथ विकसित होती रही है।
- कथक नृत्य की शुरुआत मंदिरों में कथा कहने के रूप में हुई।
- कथक का नाम कथिकों से पड़ा।
- लखनऊ, जयपुर, बनारस और रायगढ़ के घराने प्रसिद्ध हैं।
- हर घराने की अपनी विशिष्ट शैली और भाव-भंगिमाएँ हैं।
- बिरजू महाराज ने कथक में आधुनिक कवियों की रचनाएँ भी शामिल कीं।
- कथक में गर्दन और ऊँगलियों की हल्की गति महत्वपूर्ण है।
- 📌 कथिक: कथा कहने वाले कलाकार।
- 📌 घराना: संगीत या नृत्य की पारंपरिक शैली।
- 📌 भाव-भंगिमा: नृत्य में भावों और मुद्राओं का संयोजन।
संगीत और नृत्य में लय का महत्व
व्याख्यासंगीत और नृत्य में लय का महत्व
इस खंड में बिरजू महाराज ने संगीत और नृत्य के बीच के गहरे संबंध को समझाया है। उन्होंने बताया कि गाना, बजाना और नाचना तीनों संगीत के अंग हैं। संगीत में लय होती है, जो नृत्य को सुंदरता और संतुलन प्रदान करती है। नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का समन्वय
अभ्यास प्रश्न — विज्ञान के चमत्कार
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.पांडव वेश बदलकर किस राजा के पास गए?
उत्तर:
राजा विराट
व्याख्या:
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Q2.युधिष्ठिर किस नाम से विराट के दरबारी बनें?
उत्तर:
कंक
व्याख्या:
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Q3.राजा विराट के यहाँ अर्जुन ने कौन-सा कार्य किया?
उत्तर:
संगीत व नृत्य की शिक्षा देना
व्याख्या:
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Q4.दुधारू पशुओं की अच्छी पहचान किसे थी?
उत्तर:
सहदेव को
व्याख्या:
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Q5.द्रौपदी के साथ छेड़छाड़ करने के कारण कीचक को किसने मारा था?
उत्तर:
भीम
व्याख्या:
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Q6.मत्स्य देश का सेनानायक कौन था?
उत्तर:
कीचक
व्याख्या:
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Q7.त्रिगर्त देश का राजा कौन था?
उत्तर:
सुशर्मा
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Q8.युद्ध के दौरान सुशर्मा ने किसे बंदी बना लिया?
उत्तर:
विराट
व्याख्या:
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