डायरी
डायरी — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
फूल और काँटा
व्याख्याफूल और काँटा
यह कविता 'फूल और काँटा' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित है, जो बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखने वाले प्रसिद्ध कवि थे। इस कविता में कवि ने फूल और काँटे की समानताओं और भिन्नताओं के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया है। कविता में बताया गया है कि फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं, एक ही चाँदनी और हवाएँ उन पर समान रूप से पड़ती हैं, लेकिन उनके स्वभाव और प्रभाव अलग-अलग होते हैं। फूल अपनी सुगंध और रंगों से आनंद और सौंदर्य फैलाता है, जबकि काँटा छेद कर चोट पहुँचाता है और कष्ट देता है। कविता का उद्देश्य यह समझाना है कि जीवन में अच्छाई और बुराई, सौंदर्य और कठोरता, सुख और दुःख दोनों साथ-साथ होते हैं। फूल और काँटे प्रतीक हैं उन विभिन्न स्वभावों के जो हम जीवन में देखते हैं। कवि ने यह भी बताया है कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके गुणों और कर्मों से आता है, न कि केवल कुल या नाम से। इस कविता के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और सोचने के लिए प्रेरित किया गया है।
- फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं।
- उन पर समान चाँदनी, मेघ और हवाएँ पड़ती हैं।
- फूल सौंदर्य, सुगंध और आनंद का प्रतीक है।
- काँटा चोट पहुँचाने वाला और कष्ट देने वाला होता है।
- कुल की बड़ाई तभी काम आती है जब व्यक्ति में बड़प्पन हो।
- जीवन में अच्छाई और बुराई दोनों का अस्तित्व आवश्यक है।
- 📌 फूल: पौधे का वह भाग जो रंग-बिरंगा और सुगंधित होता है।
- 📌 काँटा: पौधे की वह नुकीली और कठोर संरचना जो चोट पहुँचा सकती है।
- 📌 बड़प्पन: व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों की महानता।
कवि से परिचय
व्याख्याकवि से परिचय
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जन्म 1865 में आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे जिन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखीं। उनकी प्रमुख काव्य-कृति 'प्रियप्रवास' खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए उनकी कविताएँ सरल, सहज और भावपूर्ण होती हैं, जो बच्चों के मन को आकर्षित करती हैं। 'फूल और काँटा' उनकी ऐसी ही एक कविता है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। हरिऔध जी की कविताओं में भाषा की लयात्मकता, भावों की गहराई और सरलता विशेष रूप से देखी जा सकती है। उनकी कविताएँ बच्चों को नैतिक शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी कल्पना शक्ति और अभिव्यक्ति क्षमता को भी बढ़ावा देती हैं। इस परिचय से विद्यार्थियों को कवि के व्यक्तित्व और उनकी काव्यशैली को समझने में सहायता मिलती है।
- अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जन्म 1865 में हुआ।
- वे बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखते थे।
- उनकी प्रमुख काव्य-कृति 'प्रियप्रवास' खड़ी बोली का पहला महाकाव्य है।
- उनकी कविताएँ सरल, सहज और भावपूर्ण होती हैं।
- कविताओं में भाषा की लयात्मकता और भावों की गहराई होती है।
- 📌 कवि: वह व्यक्ति जो कविता लिखता है।
- 📌 महाकाव्य: लंबा काव्यात्मक ग्रंथ जिसमें किसी विषय का विस्तृत वर्णन होता है।
पाठ से
व्याख्यापाठ से
इस खंड में कविता 'फूल और काँटा' के मुख्य अंश प्रस्तुत किए गए हैं और उनके आधार पर विद्यार्थियों के लिए प्रश्न दिए गए हैं। प्रश्नों का उद्देश्य कविता की समझ को गहरा करना और विद्यार्थियों को सोचने-समझने के लिए प्रेरित करना है। प्रश्नों में काँटे के स्वभ
अभ्यास प्रश्न — डायरी
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.देश में खान -पान की संस्कृति का कारण है?
उत्तर:
नौकरी और उद्योग -धंधे
Q2.ढाबा संस्कृति की प्रान्त से जुड़ी हुई है
उत्तर:
पंजाब
Q3.खानपान में बदलाव का कौन सा फ़ायद नही हैं?
उत्तर:
हम पहले से ज्यादा सेहतमंद हुए है
Q4.खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का क्या मतलब है?
उत्तर:
विभिन्न प्रांतो व देशों के व्यंजनों के अलग-अलग प्रकारो का मिला जुला रूप है।
Q5.लेखक खानपान में बदलाव को लेकर चिंतित क्यों है?
उत्तर:
इस बदलाव से स्थानीय व्यंजनों का अस्तित्व खतरें में है
Q6.खानपान के मामले में स्थानीयता का उदाहरण है?
उत्तर:
मुंबई की पाव भाजी
Q7.कविता में शाम की तुलना किसके साथ की गई है?
उत्तर:
किसान
Q8.कविता में किसान ने किसका साफा बांधा हुआ है?
उत्तर:
कविता में किसान ने आकाश का साफ़ा बाँधा हुआ है।