हम पक्षी उन्मुक्त गगन के
हम पक्षी उन्मुक्त गगन के — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
नहीं होना बीमार
व्याख्यानहीं होना बीमार
यह पाठ एक बच्चे के दृष्टिकोण से लिखा गया है, जो पहली बार अपने पड़ोसी सुधाकर काका को अस्पताल में देखने जाता है। कहानी में अस्पताल का माहौल, वहाँ के वार्ड, सफेद चादरें, लाल कंबल, हरे परदे, और शांति का वर्णन है। बच्चे को अस्पताल का वातावरण बहुत अच्छा लगता है क्योंकि वहाँ धूल, मच्छर-मक्खी और शोरगुल नहीं होता। नानीजी और नानाजी सुधाकर काका की देखभाल करते हैं, साबूदाने की खीर खिलाते हैं। बच्चे को बीमार होने की इच्छा होती है ताकि वह भी आराम कर सके और खीर खा सके, लेकिन जब वह असल में बीमार होने का नाटक करता है तो उसे पता चलता है कि बीमार होना इतना आसान नहीं है। उसे बुखार की दवा तो मिलती है, लेकिन भूख नहीं लगती और वह अकेला पड़ जाता है। बच्चे की भावनाएँ, उसकी कल्पनाएँ, और असली अनुभवों के बीच का अंतर कहानी में बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। अंत में बच्चा यह निर्णय करता है कि वह स्कूल से छुट्टी मारने के लिए बीमार होने का बहाना कभी नहीं बनाएगा। यह कहानी बच्चों को यह समझाती है कि बीमारी कोई मजाक नहीं है और बीमार होने के साथ कई परेशानियाँ भी आती हैं। साथ ही यह पाठ परिवार के सदस्यों के प्यार और देखभाल को भी दर्शाता है। बच्चे की कल्पना और वास्तविकता के बीच के अंतर को देखकर पाठक को जीवन के अनुभवों से जुड़ाव महसूस होता है।
- कहानी में अस्पताल का माहौल शांति और स्वच्छता से भरा है।
- बच्चे को बीमार होने की इच्छा होती है लेकिन असली बीमार होने पर उसे कठिनाइयाँ महसूस होती हैं।
- नानीजी और नानाजी बच्चे और सुधाकर काका की देखभाल करते हैं।
- बीमारी के दौरान भूख न लगना और अकेलापन महसूस होना कहानी के महत्वपूर्ण भाव हैं।
- बच्चे ने स्कूल से छुट्टी के लिए बीमारी का बहाना न बनाने का निर्णय लिया।
- 📌 वार्ड: अस्पताल का वह हिस्सा जहाँ कई मरीज एक साथ रहते हैं।
- 📌 नर्स: अस्पताल में मरीजों की देखभाल करने वाली महिला कर्मचारी।
- 📌 थर्मामीटर: शरीर का तापमान मापने का यंत्र।
लेखक से परिचय
अवधारणालेखक से परिचय
स्वयं प्रकाश हिंदी के प्रसिद्ध लेखक थे, जिनका जन्म 1947 में हुआ और निधन 2019 में हुआ। वे बच्चों और बड़ों के लिए कई रोचक और प्रेरणादायक कहानियाँ लिखते थे। उनकी कहानियाँ सरल भाषा में होती हैं और जीवन के अनुभवों को सहजता से प्रस्तुत करती हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मात्रा और भार', 'अगली किताब', 'ज्योति रथ के सारथी', 'फीनिक्स' आदि शामिल हैं। स्वयं प्रकाश की कहानियाँ पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई पुराना मित्र हमारे साथ बातें कर रहा हो। उनकी लेखनी में हँसी-मज़ाक, जीवन की सच्चाइयाँ और बच्चों की भावनाओं का सुंदर समावेश होता है।
- स्वयं प्रकाश का जन्म 1947 में हुआ और 2019 में निधन।
- वे बच्चों और बड़ों दोनों के लिए कहानियाँ लिखते थे।
- उनकी भाषा सरल और प्रभावशाली है।
- उनकी कहानियाँ जीवन के अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।
- प्रमुख रचनाएँ: मात्रा और भार, अगली किताब, ज्योति रथ के सारथी, फीनिक्स।
- 📌 लेखक: वह व्यक्ति जो साहित्यिक रचनाएँ करता है।
- 📌 कहानी: घटनाओं का वर्णन जो कल्पना या वास्तविकता पर आधारित हो।
मेरी समझ से
व्याख्यामेरी समझ से
इस अनुभाग में कहानी 'नहीं होना बीमार' से जुड़े प्रश्न दिए गए हैं, जिनके उत्तर विद्यार्थियों को सोच-समझकर देने हैं। प्रश्नों में बच्चे के विद्यालय न जाने के कारण, बीमारी के बहाने न बनाने का कारण, बच्चे की पीठ दर्द की स्थिति, और बीमारों के ठाठ के बारे
अभ्यास प्रश्न — हम पक्षी उन्मुक्त गगन के
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.तोत्तो-चान के स्थान पर यदि आप होते, तो क्या करते?
उत्तर:
अपने लाचार मित्र की सहायता करते ।
Q2.यासुकी-चान का कौन-सा सपना साकार हुआ?
उत्तर:
उपर्युक्त सभी
Q3.फ़िल्माना शब्द निम्न में से किससे मिलकर बना है?
उत्तर:
फ़िल्म + आना
Q4.यासुकी-चान ने तोत्तो-चान को टेलीविजन की क्या विशेषता बताई?
उत्तर:
उसमें घर बैठे सूमो कुश्ती देख सकेगें
Q5.यासुकी-चान को चढ़ाते समय तोत्तो-चान का उत्साह कम क्यों होने लगा?
उत्तर:
यासुकी-चान हताश हो गया था ।
Q6.यासुकी-चान पहली सीढ़ी पर भी क्यों न चढ़ सका?
उत्तर:
उसके हाथ पाँव कमज़ोर थे ।
Q7.निम्न में सही वर्तनी वाला शब्द कौन-सा है?
उत्तर:
टेलीविजन
Q8.तोत्तो-चान यासुकी-चान के लिए खतरा क्यों उठा रही थी?
उत्तर:
लाचार यासुकी-चान को द्विशाखा का आनंद देना चाहती थी