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कृषि आगत एवं हरित क्रांति

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

कृषि आगत एवं हरित क्रांति — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

7.1 कृषि आगत: परिभाषा एवं प्रकार

परिभाषा

7.1 कृषि आगत: परिभाषा एवं प्रकार

कृषि आगत (Agricultural Inputs) वे सभी साधन हैं जिनका उपयोग कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इनमें बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, कृषि यंत्र, श्रम, पूंजी आदि शामिल हैं। कृषि आगतों का सही और संतुलित उपयोग कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। कृषि आगतों के प्रकारों में प्राकृतिक (जैसे जल, भूमि), भौतिक (जैसे बीज, खाद, यंत्र), और वित्तीय (जैसे ऋण, बीमा) शामिल हैं। कृषि में आगतों की उपलब्धता और उनकी गुणवत्ता सीधे तौर पर उत्पादन को प्रभावित करती है।

  • कृषि आगतों का अर्थ है वे सभी साधन जो कृषि उत्पादन में प्रयोग होते हैं।
  • मुख्य कृषि आगतों में बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, कृषि यंत्र शामिल हैं।
  • आगतों की गुणवत्ता और मात्रा कृषि उत्पादकता को प्रभावित करती है।
  • आगतों का संतुलित उपयोग हरित क्रांति के लिए आधार है।
  • आगतों की उपलब्धता ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
  • 📌 कृषि आगत: वे साधन जो कृषि उत्पादन के लिए आवश्यक होते हैं।
  • 📌 प्राकृतिक आगत: भूमि, जल, सूर्यप्रकाश आदि।
  • 📌 भौतिक आगत: बीज, खाद, यंत्र आदि।

7.2 हरित क्रांति: परिभाषा एवं पृष्ठभूमि

अवधारणा

7.2 हरित क्रांति: परिभाषा एवं पृष्ठभूमि

हरित क्रांति (Green Revolution) भारत में 1960 के दशक में आरंभ हुई एक कृषि तकनीकी आंदोलन था, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि करना था। हरित क्रांति के तहत उच्च उत्पादकता वाले बीज (HYV), रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, सिंचाई और आधुनिक कृषि यंत्रों का व्यापक उपयोग आरंभ हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न संकट को दूर करना और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था। हरित क्रांति की पृष्ठभूमि में 1947-1965 के दौरान भारत में लगातार खाद्यान्न की कमी, सूखा, और बढ़ती जनसंख्या के कारण उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता थी।

  • हरित क्रांति 1960 के दशक में भारत में आरंभ हुई।
  • इसका मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि करना था।
  • HYV बीज, रासायनिक उर्वरक, सिंचाई, कीटनाशक प्रमुख घटक थे।
  • हरित क्रांति से भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हुआ।
  • पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका सर्वाधिक प्रभाव पड़ा।
  • 📌 हरित क्रांति: कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचारों का आंदोलन।
  • 📌 HYV बीज: उच्च उत्पादकता वाले बीज।

7.3 हरित क्रांति के प्रमुख घटक

व्याख्या

7.3 हरित क्रांति के प्रमुख घटक

हरित क्रांति के प्रमुख घटक वे साधन और तकनीक हैं जिनके माध्यम से कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि संभव हुई। इनमें HYV बीज, रासायनिक उर्वरक, सिंचाई के साधन, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण, और संस्थागत सहायता शामिल है। HYV बीजों के प्रयोग से कम समय में अधिक उत्पा

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Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University

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1भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत विशेषताएँ
10 नोट्स
2आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व
10 नोट्स
3भारत की जनसंख्या एवं मानव विकास का सूचकांक
10 नोट्स
4कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy)
9 नोट्स
5निर्धनता
9 नोट्स
6औद्योगिक पिछड़ापन एवं असंतुलित विकास
9 नोट्स
7बेरोजगारी
9 नोट्स
8जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि (Population Explosion)
8 नोट्स
9भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में
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10कृषि आगत एवं हरित क्रांति
वर्तमान
11राष्ट्रीय आय एवं प्रकृति तथा व्यक्तिगत आय का निर्धारण
10 नोट्स
12कृषि शाख : संस्थागत साख के विशेष संदर्भ में
8 नोट्स
13अर्थव्यवस्था की दोहरी प्रकृति (Dual Nature of Economy)
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14भारत में खाद्य सुरक्षा
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15भूमंडलीकरण एवं भारतीय कृषि
9 नोट्स

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