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कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy)

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy) — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

3.1 कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ

व्याख्या

3.1 कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ

भारत की अर्थव्यवस्था को कृषि प्रधान कहा जाता है क्योंकि स्वतंत्रता के समय देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी। कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था का तात्पर्य है वह अर्थव्यवस्था जिसमें कृषि का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रमुख योगदान हो, अधिकतर जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न हो, तथा कृषि से जुड़े उद्योगों का वर्चस्व हो। भारत में कृषि का महत्व ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। कृषि न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, कच्चे माल की आपूर्ति, और निर्यात के क्षेत्र में भी योगदान देती है। स्वतंत्रता के समय लगभग 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी और कृषि का GDP में योगदान 50% से अधिक था। कृषि प्रधानता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर, उत्पादन के साधनों की उपलब्धता, और सामाजिक संरचना भी कृषि के इर्द-गिर्द घूमती थी। कृषि प्रधानता के कारण अर्थव्यवस्था में विविधता की कमी, औद्योगिकीकरण की धीमी गति, और आय में असमानता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।

  • स्वतंत्रता के समय भारत की 70% से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी।
  • कृषि का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 50% से अधिक था।
  • कृषि प्रधानता से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की अधिकता थी।
  • कृषि से जुड़े उद्योगों का भी अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान था।
  • कृषि प्रधानता के कारण औद्योगिक विकास धीमा रहा।
  • आय में असमानता और क्षेत्रीय विषमताएँ बनी रहीं।
  • 📌 कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था: वह अर्थव्यवस्था जिसमें कृषि का प्रमुख स्थान हो।
  • 📌 सकल घरेलू उत्पाद (GDP): एक देश में एक वर्ष में उत्पादित कुल वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य।

3.2 भारतीय कृषि का महत्व

व्याख्या

3.2 भारतीय कृषि का महत्व

भारतीय कृषि का महत्व बहुआयामी है। यह न केवल देश की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, कच्चे माल की आपूर्ति, औद्योगिक विकास, निर्यात आय, और सामाजिक स्थिरता में भी योगदान देती है। कृषि के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन उपलब्ध होते हैं। भारत की लगभग 58% जनसंख्या आज भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। कृषि से उत्पादित वस्तुएँ जैसे कपास, गन्ना, जूट, तंबाकू आदि उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करती हैं। कृषि उत्पादों का निर्यात विदेशी मुद्रा अर्जन का महत्वपूर्ण स्रोत है, जैसे चाय, कॉफी, मसाले, और चावल। कृषि के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में आय, जीवन स्तर, और सामाजिक संरचना में भी सुधार आता है। इसके अतिरिक्त, कृषि का महत्व खाद्य सुरक्षा, पोषण, और पर्यावरण संतुलन के लिए भी है।

  • कृषि देश की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
  • 58% से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • कृषि उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
  • कृषि उत्पादों का निर्यात विदेशी मुद्रा अर्जन का स्रोत है।
  • ग्रामीण रोजगार और सामाजिक स्थिरता में कृषि की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • कृषि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
  • 📌 खाद्य सुरक्षा: देश की जनसंख्या के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य उपलब्धता।
  • 📌 कच्चा माल: वह सामग्री जो उद्योगों में वस्तुएँ बनाने के लिए प्रयोग होती है।

3.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

व्याख्या

3.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

भारतीय कृषि अनेक समस्याओं से ग्रस्त है, जिनका प्रभाव उत्पादन, उत्पादकता, और किसानों की आय पर पड़ता है। प्रमुख समस्याओं में असमान भूमि वितरण, पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ, सिंचाई की कमी, पूंजी की कमी, विपणन की असुविधाएँ, प्राकृतिक आपदाएँ, और सरकारी नीतियों

SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi) के सभी 17 अध्याय

Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत विशेषताएँ
10 नोट्स
2आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व
10 नोट्स
3भारत की जनसंख्या एवं मानव विकास का सूचकांक
10 नोट्स
4कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy)
वर्तमान
5निर्धनता
9 नोट्स
6औद्योगिक पिछड़ापन एवं असंतुलित विकास
9 नोट्स
7बेरोजगारी
9 नोट्स
8जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि (Population Explosion)
8 नोट्स
9भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में
8 नोट्स
10कृषि आगत एवं हरित क्रांति
9 नोट्स
11राष्ट्रीय आय एवं प्रकृति तथा व्यक्तिगत आय का निर्धारण
10 नोट्स
12कृषि शाख : संस्थागत साख के विशेष संदर्भ में
8 नोट्स
13अर्थव्यवस्था की दोहरी प्रकृति (Dual Nature of Economy)
9 नोट्स
14भारत में खाद्य सुरक्षा
9 नोट्स
15भूमंडलीकरण एवं भारतीय कृषि
9 नोट्स

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