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भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 भारतीय कृषि का महत्व

व्याख्या

6.1 भारतीय कृषि का महत्व

भारतीय कृषि का देश की अर्थव्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भारत की लगभग 58% जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करती है। कृषि न केवल खाद्य सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि यह कच्चे माल की आपूर्ति, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास, और विदेशी मुद्रा अर्जन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि का योगदान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भी उल्लेखनीय है, हालांकि समय के साथ इसका प्रतिशत कम हुआ है। स्वतंत्रता के समय कृषि का GDP में योगदान लगभग 55% था, जो अब घटकर लगभग 17-18% रह गया है। फिर भी, यह क्षेत्र ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन, और सामाजिक स्थिरता के लिए आधारशिला है। कृषि के माध्यम से ही भारत ने हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, और नीली क्रांति जैसे आंदोलन किए, जिससे देश की खाद्य उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। कृषि का महत्व केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी है, क्योंकि भारतीय समाज की परंपराएँ, त्यौहार, और जीवनशैली कृषि से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

  • भारत की 58% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • कृषि GDP में लगभग 17-18% योगदान देती है।
  • कृषि रोजगार का मुख्य स्रोत है।
  • कृषि कच्चे माल की आपूर्ति करती है।
  • कृषि से विदेशी मुद्रा अर्जन होता है।
  • कृषि सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी है।
  • 📌 कृषि: भूमि पर फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि कार्य।
  • 📌 हरित क्रांति: 1960 के दशक में कृषि उत्पादन में वृद्धि हेतु अपनाई गई तकनीकी क्रांति।

6.2 भारतीय कृषि की प्रकृति

अवधारणा

6.2 भारतीय कृषि की प्रकृति

भारतीय कृषि की प्रकृति विविधतापूर्ण और पारंपरिक है। यह मुख्यतः मानसून पर निर्भर है, अतः इसे मानसूनी कृषि भी कहा जाता है। भारत में कृषि भूमि का आकार प्रायः छोटा और बिखरा हुआ है, जिससे उत्पादन क्षमता सीमित रहती है। भारतीय कृषि श्रम प्रधान है, अर्थात् यहाँ मशीनों की अपेक्षा मानव श्रम का अधिक उपयोग होता है। अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं होते। फसल विविधता भी भारतीय कृषि की एक विशेषता है, जिसमें खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, नकदी फसलें, बागवानी, और पशुपालन शामिल हैं। सिंचाई की व्यवस्था सीमित है, जिससे सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ता है। परंपरागत तकनीकों और उन्नत बीजों की कमी के कारण उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है।

  • भारतीय कृषि मानसून पर निर्भर है।
  • भूमि का आकार छोटा और बिखरा हुआ है।
  • श्रम प्रधान कृषि है।
  • फसल विविधता पाई जाती है।
  • सिंचाई की व्यवस्था सीमित है।
  • उन्नत तकनीकों का अभाव है।
  • 📌 मानसूनी कृषि: वर्षा पर आधारित कृषि।
  • 📌 सीमांत किसान: जिनके पास 1 हेक्टेयर से कम भूमि है।

6.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

व्याख्या

6.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

भारतीय कृषि अनेक समस्याओं से ग्रस्त है, जिनमें प्राकृतिक, तकनीकी, आर्थिक, और सामाजिक समस्याएँ प्रमुख हैं। मानसून की अनिश्चितता के कारण सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएँ बार-बार आती हैं। भूमि का अत्यधिक विखंडन, सीमांत और छोटे किसानों की अधिकता, उन्नत बीजों, उर

SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi) के सभी 17 अध्याय

Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत विशेषताएँ
10 नोट्स
2आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व
10 नोट्स
3भारत की जनसंख्या एवं मानव विकास का सूचकांक
10 नोट्स
4कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy)
9 नोट्स
5निर्धनता
9 नोट्स
6औद्योगिक पिछड़ापन एवं असंतुलित विकास
9 नोट्स
7बेरोजगारी
9 नोट्स
8जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि (Population Explosion)
8 नोट्स
9भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में
वर्तमान
10कृषि आगत एवं हरित क्रांति
9 नोट्स
11राष्ट्रीय आय एवं प्रकृति तथा व्यक्तिगत आय का निर्धारण
10 नोट्स
12कृषि शाख : संस्थागत साख के विशेष संदर्भ में
8 नोट्स
13अर्थव्यवस्था की दोहरी प्रकृति (Dual Nature of Economy)
9 नोट्स
14भारत में खाद्य सुरक्षा
9 नोट्स
15भूमंडलीकरण एवं भारतीय कृषि
9 नोट्स

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