Ch 4निःशुल्क

खिलजी राज्य व्यवस्था, बाजार नियंत्रण एवं सैन्य सुधार

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (1200-1740 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

खिलजी राज्य व्यवस्था, बाजार नियंत्रण एवं सैन्य सुधार — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

खिलजी राज्य व्यवस्था का परिचय

व्याख्या

खिलजी राज्य व्यवस्था का परिचय

खिलजी वंश का शासन भारत में 1290 ई. से 1320 ई. तक रहा। इस वंश के संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी थे, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में खिलजी वंश की शक्ति और विस्तार चरम पर पहुँची। खिलजी राज्य व्यवस्था ने दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किए। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन को सुदृढ़ करने के लिए कई सुधार किए, जिनमें प्रशासनिक केंद्रीकरण, बाजार नियंत्रण, और सैन्य सुधार प्रमुख थे। राज्य व्यवस्था में सुल्तान सर्वोच्च था, और उसके अधीन विभिन्न विभागों का गठन किया गया था, जैसे दीवान-ए-विजारत (वित्त विभाग), दीवान-ए-रियासत (राजस्व विभाग), दीवान-ए-इंशा (पत्राचार विभाग), और दीवान-ए-आरिज (सैन्य विभाग)। खिलजी शासन में अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता और सुल्तान की निष्ठा के आधार पर की जाती थी। सुल्तान ने अपने दरबार में अमीरों, उमरा, और मलिकों को रखा, जिनकी जिम्मेदारी प्रशासनिक और सैन्य कार्यों की थी।

  • खिलजी वंश का शासनकाल 1290-1320 ई. तक रहा।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने राज्य व्यवस्था में कई सुधार किए।
  • प्रशासनिक केंद्रीकरण को प्राथमिकता दी गई।
  • विभिन्न विभागों का गठन किया गया, जैसे दीवान-ए-विजारत, दीवान-ए-रियासत।
  • अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता व निष्ठा के आधार पर होती थी।
  • सुल्तान सर्वोच्च सत्ता का केंद्र था।
  • 📌 सुल्तान: राज्य का सर्वोच्च शासक
  • 📌 दीवान-ए-विजारत: वित्त विभाग
  • 📌 दीवान-ए-रियासत: राजस्व विभाग

खिलजी प्रशासनिक सुधार

अवधारणा

खिलजी प्रशासनिक सुधार

अलाउद्दीन खिलजी ने प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से अपने शासन को सुदृढ़ किया। उसने अधिकारियों की नियुक्ति में योग्यता और निष्ठा को प्राथमिकता दी। भ्रष्टाचार रोकने के लिए अधिकारियों की नियमित जांच की जाती थी। राज्य को कई इकाइयों में विभाजित किया गया, जैसे इक्ताओं, जिनका प्रशासन इक्तादारों को सौंपा गया। इक्तादारों को भूमि से राजस्व वसूलने का अधिकार था, लेकिन वे सुल्तान के अधीन रहते थे। अलाउद्दीन ने कर संग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया और किसानों से सीधा कर वसूलने की व्यवस्था की। न्यायिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया, जिसमें काजी और मुंशी नियुक्त किए गए। अपराधों की रोकथाम के लिए कठोर दंड व्यवस्था लागू की गई। प्रशासनिक सुधारों से राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ।

  • अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता व निष्ठा के आधार पर होती थी।
  • राज्य को इक्ताओं में विभाजित किया गया।
  • इक्तादारों को भूमि से राजस्व वसूलने का अधिकार था।
  • कर संग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई गई।
  • न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया।
  • अपराधों की रोकथाम हेतु कठोर दंड व्यवस्था लागू की गई।
  • 📌 इक्तादार: भूमि का प्रशासनिक अधिकारी
  • 📌 काजी: न्यायिक अधिकारी
  • 📌 मुंशी: लेखा-जोखा रखने वाला अधिकारी

खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति

व्याख्या

खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति

अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण की नीति लागू की, जिसका उद्देश्य राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और सेना के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना था। उसने दिल्ली में अलग-अलग बाजारों की स्थापना की, जैसे अनाज बाजार, कपड़ा बाजार, घोड़ा बाज

SLM - History of India (1200-1740 AD) (Hindi) के सभी 20 अध्याय

History of India (1200-1740 AD) · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1भारतीय इतिहास के स्रोत
10 नोट्स
2तुर्क आक्रमण के समय भारत की स्थिति, दिल्ली सल्तनत की स्थापना
9 नोट्स
3खिलजी साम्राज्यवाद
10 नोट्स
4खिलजी राज्य व्यवस्था, बाजार नियंत्रण एवं सैन्य सुधार
वर्तमान
5मुहम्मद बिन तुगलक – नीतियाँ एवं प्रशासनिक प्रयास
10 नोट्स
6फिरोजशाह तुगलक – शासन एवं धार्मिक नीति
11 नोट्स
7क्षेत्रीय राज्य का उदय – बंगाल, जौनपुर, मालवा व गुजरात
11 नोट्स
8दक्षिण भारत – बहमनी और विजयनगर साम्राज्य
11 नोट्स
9सल्तनतकालीन अर्थव्यवस्था, समाज एवं कुलीन वर्ग
9 नोट्स
10मुगल साम्राज्य की स्थापना : बाबर और हुमायूँ
9 नोट्स
11शेरशाह एवं उसका शासन
10 नोट्स
12अकबर – मुगल साम्राज्य का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण
8 नोट्स
13जहांगीर : मुगल दरबार में नूरजहां की भूमिका
9 नोट्स
14शाहजहां : दक्खन, मध्य एशिया एवं ईरान से संबंध
10 नोट्स
15औरंगजेब : दक्खन, नीति, मुगल साम्राज्य का पतन और उत्तर
9 नोट्स

5 और अध्याय — सभी देखें →