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खिलजी साम्राज्यवाद

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (1200-1740 AD) (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट

खिलजी साम्राज्यवाद — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

खिलजी साम्राज्यवाद भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो 1290 ई. से 1320 ई. तक दिल्ली सल्तनत के शासनकाल को दर्शाता है। इस काल में खिलजी वंश ने सत्ता संभाली और अपने शासन के दौरान साम्राज्य विस्तार, प्रशासनिक सुधार, आर्थिक नीतियों, सैन्य अभियानों और सांस्कृतिक प्रभावों के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में गहरा प्रभाव डाला। खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिलजी था, जिसने गुलाम वंश के पतन के बाद सत्ता प्राप्त की। उसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने सत्ता संभाली, जो इस वंश का सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध शासक रहा। खिलजी साम्राज्यवाद की विशेषता थी उसकी आक्रामक सैन्य नीति, दक्षिण भारत में विजय अभियान, प्रशासनिक केंद्रीकरण और बाजार नियंत्रण की नीति। इस काल में मंगोल आक्रमणों का भी सामना किया गया और दिल्ली सल्तनत की सीमाएँ दक्षिण भारत तक विस्तारित हुईं।

  • खिलजी वंश की स्थापना 1290 ई. में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने की।
  • अलाउद्दीन खिलजी का शासनकाल (1296-1316 ई.) सबसे महत्वपूर्ण रहा।
  • खिलजी शासनकाल में साम्राज्य का विस्तार दक्षिण भारत तक हुआ।
  • प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधारों की शुरुआत इसी काल में हुई।
  • मंगोल आक्रमणों का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया गया।
  • खिलजी काल सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा।
  • 📌 खिलजी वंश: दिल्ली सल्तनत का एक तुर्की वंश, जिसने 1290-1320 ई. तक शासन किया।
  • 📌 सल्तनत: एक इस्लामी साम्राज्य का शासन क्षेत्र।

खिलजी वंश की स्थापना

व्याख्या

खिलजी वंश की स्थापना

खिलजी वंश की स्थापना 1290 ई. में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने की थी। गुलाम वंश के अंतिम शासक क्यूमर्स के पतन के बाद, दिल्ली सल्तनत में अस्थिरता का माहौल था। जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने इस अवसर का लाभ उठाकर सत्ता पर अधिकार किया। खिलजी वंश तुर्की मूल का था, किंतु भारत में इनका रहन-सहन और संस्कृति काफी हद तक भारतीय हो चुकी थी। जलालुद्दीन ने सत्ता में आते ही अपने शासन को स्थिर करने के लिए उदार नीतियाँ अपनाईं। उसने अपने विरोधियों को क्षमा कर दिया और प्रशासन में स्थिरता लाने का प्रयास किया। जलालुद्दीन फिरोज खिलजी के शासनकाल में मंगोल आक्रमणों का सामना भी करना पड़ा, जिसमें उसने साहस का परिचय दिया।

  • खिलजी वंश की स्थापना 1290 ई. में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने की।
  • गुलाम वंश के पतन के बाद सत्ता में आए।
  • जलालुद्दीन ने उदार और क्षमाशील नीति अपनाई।
  • प्रशासनिक स्थिरता के लिए प्रयास किए।
  • मंगोल आक्रमण का सफल प्रतिरोध किया।
  • खिलजी वंश ने दिल्ली सल्तनत को एक नई दिशा दी।
  • 📌 जलालुद्दीन फिरोज खिलजी: खिलजी वंश का संस्थापक और पहला शासक।
  • 📌 गुलाम वंश: दिल्ली सल्तनत का पहला वंश, जिसका अंत खिलजी वंश के उदय के साथ हुआ।

अलाउद्दीन खिलजी का उदय

व्याख्या

अलाउद्दीन खिलजी का उदय

अलाउद्दीन खिलजी, जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का भतीजा और दामाद था। उसने 1296 ई. में जलालुद्दीन की हत्या कर सत्ता प्राप्त की। अलाउद्दीन का शासनकाल (1296-1316 ई.) खिलजी वंश का स्वर्णिम युग माना जाता है। उसने सत्ता में आते ही प्रशासनिक केंद्रीकरण, सैन्य सुधा

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History of India (1200-1740 AD) · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1भारतीय इतिहास के स्रोत
10 नोट्स
2तुर्क आक्रमण के समय भारत की स्थिति, दिल्ली सल्तनत की स्थापना
9 नोट्स
3खिलजी साम्राज्यवाद
वर्तमान
4खिलजी राज्य व्यवस्था, बाजार नियंत्रण एवं सैन्य सुधार
9 नोट्स
5मुहम्मद बिन तुगलक – नीतियाँ एवं प्रशासनिक प्रयास
10 नोट्स
6फिरोजशाह तुगलक – शासन एवं धार्मिक नीति
11 नोट्स
7क्षेत्रीय राज्य का उदय – बंगाल, जौनपुर, मालवा व गुजरात
11 नोट्स
8दक्षिण भारत – बहमनी और विजयनगर साम्राज्य
11 नोट्स
9सल्तनतकालीन अर्थव्यवस्था, समाज एवं कुलीन वर्ग
9 नोट्स
10मुगल साम्राज्य की स्थापना : बाबर और हुमायूँ
9 नोट्स
11शेरशाह एवं उसका शासन
10 नोट्स
12अकबर – मुगल साम्राज्य का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण
8 नोट्स
13जहांगीर : मुगल दरबार में नूरजहां की भूमिका
9 नोट्स
14शाहजहां : दक्खन, मध्य एशिया एवं ईरान से संबंध
10 नोट्स
15औरंगजेब : दक्खन, नीति, मुगल साम्राज्य का पतन और उत्तर
9 नोट्स

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