हमारा पर्यावरण
हमारा पर्यावरण — अध्ययन नोट्स
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हमारा पर्यावरण
व्याख्याहमारा पर्यावरण
पर्यावरण शब्द हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह शब्द हम रोज़मर्रा की बातचीत, समाचार पत्रों, टेलीविजन आदि में सुनते और पढ़ते हैं। पर्यावरण का अर्थ है हमारे आस-पास का वह प्राकृतिक और कृत्रिम वातावरण जिसमें हम रहते हैं। पर्यावरण में सभी जीव-जंतु, पौधे, सूक्ष्मजीव और उनके भौतिक वातावरण के अजैव घटक शामिल होते हैं। पर्यावरणीय समस्याएँ आज वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी हैं। विकासशील और विकसित देशों के सम्मेलन नियमित रूप से पर्यावरण संरक्षण के लिए होते हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि पर्यावरण के विभिन्न घटक किस प्रकार एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं और मानव गतिविधियाँ पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।
- पर्यावरण में जीवित और अजैव घटक शामिल होते हैं।
- पर्यावरणीय समस्याएँ वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय हैं।
- पर्यावरण में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
- मानव गतिविधियाँ पर्यावरण को प्रभावित करती हैं।
- 📌 पर्यावरण: हमारे आस-पास का प्राकृतिक और कृत्रिम वातावरण।
13.1 पारितंत्र—इसके संघटक क्या हैं?
व्याख्या13.1 पारितंत्र—इसके संघटक क्या हैं?
पारितंत्र (Ecosystem) वह प्रणाली है जिसमें सभी जीव-जंतु, पौधे, सूक्ष्मजीव और उनके भौतिक वातावरण के अजैव घटक एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। इसमें जीवित घटक जैसे पौधे, जानवर, मानव और सूक्ष्मजीव तथा अजैव घटक जैसे ताप, वर्षा, वायु, मृदा और खनिज शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, एक बगीचा जिसमें घास, वृक्ष, फूल, मेंढक, कीट और पक्षी होते हैं, वह एक पारितंत्र है। वन, तालाब, झील प्राकृतिक पारितंत्र के उदाहरण हैं जबकि बगीचा और खेत मानव निर्मित (कृत्रिम) पारितंत्र हैं। जीवों को उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक वर्गों में बांटा जाता है। उत्पादक वे जीव होते हैं जो सूर्य की ऊर्जा का उपयोग कर प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं, जैसे हरे पौधे और नील-हरित शैवाल। उपभोक्ता वे जीव होते हैं जो उत्पादकों या अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं। अपघटक जीवाणु और कवक होते हैं जो मृत जीवों और कचरे को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
- पारितंत्र में जीवित और अजैव घटक होते हैं।
- प्राकृतिक पारितंत्र जैसे वन, तालाब और कृत्रिम पारितंत्र जैसे बगीचा, खेत होते हैं।
- जीवों को उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक में वर्गीकृत किया जाता है।
- उत्पादक सूर्य की ऊर्जा से कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं।
- अपघटक मृत पदार्थों को अपघटित कर मिट्टी को पोषित करते हैं।
- 📌 पारितंत्र: जीव और अजैव घटकों का परस्पर क्रिया करने वाला प्राकृतिक या कृत्रिम तंत्र।
- 📌 उत्पादक: वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं।
- 📌 उपभोक्ता: वे जीव जो उत्पादकों या अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं।
13.1.1 आहार शृंखला एवं जाल
व्याख्या13.1.1 आहार शृंखला एवं जाल
आहार शृंखला जीवों की एक सरल रेखीय श्रृंखला होती है जिसमें ऊर्जा और पोषक तत्व एक जीव से दूसरे जीव तक स्थानांतरित होते हैं। यह श्रृंखला हमेशा उत्पादकों से शुरू होती है, जो सूर्य की ऊर्जा को प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित करते है
अभ्यास प्रश्न — हमारा पर्यावरण
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.पराबैंगनी विकिरण के अत्यधिक जोखिम का कारण बनता है
उत्तर:
त्वचा का कैंसर
Q2.निम्नलिखित में से कौन से दो सेट समान ट्राफिक स्तर के हैं?
उत्तर:
मेंढक; छिपकली
Q3.यदि दिए गए खाद्य श्रृंखला में सभी हिरण मारे गए तो क्या होगा? घास → हिरण → शेर
उत्तर:
शेरों की आबादी घटती है और घास बढ़ती है।
Q4.दिए गए फूडचेन में अगर चौथे ट्रॉफिक स्तर पर ऊर्जा की मात्रा 4 kJ है, तो उत्पादक स्तर पर क्या ऊर्जा उपलब्ध होगी? घास → ग्रासहॉपर → मेंढक → साँप
उत्तर:
4000 kJ
Q5.ओजोन परत की कमी का कारण बनता है
उत्तर:
यूवी विकिरणों में वृद्धि
Q6.एक खाद्य श्रृंखला में, तीसरे ट्रॉफिक स्तर पर हमेशा कब्जा होता है
उत्तर:
मांसाहारी
Q7.निम्नलिखित में से कौन सा रसायन ओजोन परत का क्षय करता है?
उत्तर:
क्लोरो फ्लोरो कार्बन
Q8.निम्नलिखित में से कौन सा जोड़ा प्राथमिक उपभोक्ताओं की श्रेणी से संबंधित है?
उत्तर:
ग्राशपॉपर और मवेशी
Vigyan के सभी 13 अध्याय
Science · Class 10