Ch 8निःशुल्क

भारतीय रिजर्व बैंक एवं मौद्रिक नीति

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

भारतीय रिजर्व बैंक एवं मौद्रिक नीति — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भारतीय रिजर्व बैंक: स्थापना, उद्देश्य एवं कार्य

व्याख्या

भारतीय रिजर्व बैंक: स्थापना, उद्देश्य एवं कार्य

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में मौद्रिक स्थिरता बनाए रखना, बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करना, तथा आर्थिक विकास में सहायता देना है। RBI भारत का केंद्रीय बैंक है, जो देश की मुद्रा, बैंकिंग, और वित्तीय प्रणाली को नियंत्रित करता है। RBI के प्रमुख कार्यों में मुद्रा निर्गमन, बैंकिंग प्रणाली का नियमन, सरकार का बैंक, विदेशी मुद्रा नियंत्रण, तथा क्रेडिट नियंत्रण शामिल हैं। RBI का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। RBI के कार्यों में सार्वजनिक हित की रक्षा, वित्तीय स्थिरता बनाए रखना, और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना शामिल है। RBI के पास नोट छापने का अधिकार है (₹2 और उससे अधिक मूल्य के नोट), जबकि ₹1 के नोट भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। RBI बैंकों का बैंक भी है, अर्थात् यह अन्य बैंकों को ऋण देता है और उनकी जमा राशि रखता है।

  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई
  • RBI का मुख्य उद्देश्य मौद्रिक स्थिरता और बैंकिंग प्रणाली का नियंत्रण है
  • RBI नोट निर्गमन, बैंकिंग नियमन, और सरकार का बैंक है
  • RBI विदेशी मुद्रा नियंत्रण और क्रेडिट नियंत्रण करता है
  • RBI का मुख्यालय मुंबई में स्थित है
  • ₹2 और उससे अधिक मूल्य के नोट RBI द्वारा जारी किए जाते हैं
  • 📌 मुद्रा निर्गमन: RBI द्वारा नोटों का जारी करना
  • 📌 बैंकों का बैंक: RBI द्वारा अन्य बैंकों को ऋण देना
  • 📌 मौद्रिक स्थिरता: मुद्रा की स्थिरता बनाए रखना

मौद्रिक नीति: अर्थ एवं उद्देश्य

अवधारणा

मौद्रिक नीति: अर्थ एवं उद्देश्य

मौद्रिक नीति वह नीति है जिसके द्वारा केंद्रीय बैंक (RBI) देश की मुद्रा और क्रेडिट की आपूर्ति को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक स्थिरता, मूल्य स्थिरता, और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना है। मौद्रिक नीति के माध्यम से RBI ब्याज दरों, बैंकिंग प्रणाली में धन की उपलब्धता, और क्रेडिट की मात्रा को नियंत्रित करता है। मौद्रिक नीति दो प्रकार की होती है: विस्तारवादी (Expansionary) और संकुचनवादी (Contractionary)। विस्तारवादी नीति में धन की आपूर्ति बढ़ाई जाती है, जबकि संकुचनवादी नीति में धन की आपूर्ति घटाई जाती है। मौद्रिक नीति के उद्देश्य हैं: मूल्य स्थिरता, पूर्ण रोजगार, आर्थिक विकास, और भुगतान संतुलन।

  • मौद्रिक नीति RBI द्वारा मुद्रा और क्रेडिट की आपूर्ति को नियंत्रित करती है
  • मौद्रिक नीति के मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता और आर्थिक विकास हैं
  • मौद्रिक नीति दो प्रकार की होती है: विस्तारवादी और संकुचनवादी
  • विस्तारवादी नीति में धन की आपूर्ति बढ़ाई जाती है
  • संकुचनवादी नीति में धन की आपूर्ति घटाई जाती है
  • मौद्रिक नीति से ब्याज दरों और क्रेडिट की मात्रा नियंत्रित होती है
  • 📌 मौद्रिक नीति: मुद्रा और क्रेडिट की आपूर्ति को नियंत्रित करने की नीति
  • 📌 विस्तारवादी नीति: धन की आपूर्ति बढ़ाने की नीति
  • 📌 संकुचनवादी नीति: धन की आपूर्ति घटाने की नीति

मौद्रिक नीति के साधन

व्याख्या

मौद्रिक नीति के साधन

मौद्रिक नीति के साधन वे उपाय हैं जिनके द्वारा RBI मुद्रा और क्रेडिट की आपूर्ति को नियंत्रित करता है। ये साधन दो प्रकार के होते हैं: (1) प्रत्यक्ष साधन (Direct Instruments) और (2) अप्रत्यक्ष साधन (Indirect Instruments)। प्रत्यक्ष साधनों में बैंक दर नी

SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi) के सभी 16 अध्याय

Money, Banking & Public Finance · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1मुद्रा : अर्थ, कार्य एवं महत्व
10 नोट्स
2मुद्रा की मांग एवं पूर्ति की अवधारणा, M M M
9 नोट्स
3मुद्रा का मूल्य - मुद्रा स्फीति एवं मुद्रा संकुचन, मांग एवं
9 नोट्स
4मुद्रा का परिमाण सिद्धांत, फिशर का समीकरण
9 नोट्स
5व्यापारिक बैंकिंग : योगदान एवं कार्य एवं साख सृजन
10 नोट्स
6केन्द्रीय बैंक : प्रकृति एवं कार्य – भारत जैसे विकासशील
9 नोट्स
8भारतीय रिजर्व बैंक एवं मौद्रिक नीति
वर्तमान
9अंतरराष्ट्रीय व्यापार : अर्थ एवं अंतरराष्ट्रीय व अंतर
9 नोट्स
10रिकार्डो का तुलनात्मक लागत का सिद्धांत
10 नोट्स
11विनिमय दर निर्धारण-स्वर्णमान, स्थिरित समता सिद्धांत
11 नोट्स
12सार्वजनिक वित्त- अर्थ, सार्वजनिक वित्त एवं निजी वित्त
11 नोट्स
13सार्वजनिक आय, कर, अच्छी कर प्रणाली के गुण एवं
9 नोट्स
14कराघात एवं करापात के सैद्धांतिक पक्ष एवं प्रतियोगिता
8 नोट्स
15सार्वजनिक व्यय, नियम, उत्पादन तथा वितरण पर प्रभाव
10 नोट्स
16सार्वजनिक ऋण - भारत में आंतरिक एवं बाह्य सार्वजनिक ऋण
10 नोट्स

1 और अध्याय — सभी देखें →