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मुद्रा की मांग एवं पूर्ति की अवधारणा, M M M

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

मुद्रा की मांग एवं पूर्ति की अवधारणा, M M M — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

2.1 मुद्रा की अवधारणा

अवधारणा

2.1 मुद्रा की अवधारणा

मुद्रा का अर्थ है – वह वस्तु जिसे सामान्यतः विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है। मुद्रा के विकास ने व्यापार, वाणिज्य और आर्थिक गतिविधियों को सरल बनाया है। प्रारंभ में वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) प्रचलित थी, जिसमें वस्तुओं का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था। परंतु इसमें कई कठिनाइयाँ थीं, जैसे – दोहरा संयोग, मूल्य निर्धारण, वस्तुओं का विभाजन आदि। इन समस्याओं के समाधान के लिए मुद्रा का विकास हुआ। मुद्रा के मुख्य कार्य हैं – विनिमय का माध्यम, मूल्य मापन की इकाई, भविष्य के भुगतान का साधन, और मूल्य का संचय। मुद्रा के रूपों में धातु मुद्रा, कागजी मुद्रा, और बैंक मुद्रा प्रमुख हैं। आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है, क्योंकि यह आर्थिक गतिविधियों का आधार है।

  • मुद्रा वह वस्तु है जिसे समाज विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार करता है।
  • मुद्रा के विकास ने वस्तु-विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों को दूर किया।
  • मुद्रा के चार मुख्य कार्य होते हैं – विनिमय का माध्यम, मूल्य मापन, भविष्य के भुगतान का साधन, मूल्य संचय।
  • मुद्रा के विभिन्न रूप – धातु मुद्रा, कागजी मुद्रा, बैंक मुद्रा।
  • मुद्रा के बिना आर्थिक गतिविधियाँ जटिल होती हैं।
  • मुद्रा आधुनिक अर्थव्यवस्था का आधार है।
  • 📌 मुद्रा: वह वस्तु जिसे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाए।
  • 📌 वस्तु-विनिमय प्रणाली: वस्तुओं के प्रत्यक्ष आदान-प्रदान की प्रणाली।

2.2 मुद्रा की मांग

अवधारणा

2.2 मुद्रा की मांग

मुद्रा की मांग से तात्पर्य है – वह मात्रा जिसे लोग या संस्थाएँ किसी निश्चित समय पर अपने पास रखना चाहती हैं। मुद्रा की मांग के दो प्रमुख उद्देश्य होते हैं – (1) लेन-देन की मांग (Transactions Demand), (2) सावधानी की मांग (Precautionary Demand), और (3) सट्टा/सट्टेबाजी की मांग (Speculative Demand)। केन्स के अनुसार, लेन-देन की मांग आय पर निर्भर करती है, जबकि सट्टा मांग ब्याज दर पर निर्भर करती है। लेन-देन की मांग का संबंध दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति से है, जबकि सट्टा मांग भविष्य के लाभ की संभावना पर आधारित होती है। मुद्रा की कुल मांग = लेन-देन की मांग + सावधानी की मांग + सट्टा मांग।

  • मुद्रा की मांग वह मात्रा है जिसे लोग अपने पास रखना चाहते हैं।
  • मुद्रा की मांग के तीन उद्देश्य – लेन-देन, सावधानी, सट्टा।
  • लेन-देन की मांग आय पर निर्भर करती है।
  • सट्टा मांग ब्याज दर पर निर्भर करती है।
  • मुद्रा की कुल मांग तीनों मांगों का योग है।
  • केन्स ने मुद्रा की मांग के विश्लेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 📌 लेन-देन की मांग: दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मुद्रा की मांग।
  • 📌 सट्टा मांग: भविष्य के लाभ की संभावना के लिए मुद्रा की मांग।

2.3 मुद्रा की मांग के निर्धारक

व्याख्या

2.3 मुद्रा की मांग के निर्धारक

मुद्रा की मांग के निर्धारक वे कारक हैं, जो यह तय करते हैं कि लोग कितनी मुद्रा अपने पास रखना चाहेंगे। मुख्य निर्धारक हैं – (1) आय का स्तर, (2) ब्याज दर, (3) भुगतान की आवृत्ति, (4) बैंकिंग सुविधाएँ, (5) मूल्य स्तर, (6) आर्थिक स्थिरता। आय का स्तर बढ़ने

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1मुद्रा : अर्थ, कार्य एवं महत्व
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2मुद्रा की मांग एवं पूर्ति की अवधारणा, M M M
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3मुद्रा का मूल्य - मुद्रा स्फीति एवं मुद्रा संकुचन, मांग एवं
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