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कृषि आगत एवं हरित क्रांति

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

कृषि आगत एवं हरित क्रांति — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में कृषि के भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्व को विस्तार से समझाया गया है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ जनसंख्या का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है। स्वतंत्रता के समय कृषि की स्थिति अत्यंत पिछड़ी हुई थी, उत्पादन कम था, और पारंपरिक विधियों का प्रयोग होता था। कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक विधियों, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई, रासायनिक खाद, कीटनाशकों आदि का उपयोग आवश्यक था। इस अध्याय में कृषि आगतों (inputs) और हरित क्रांति (Green Revolution) के प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। कृषि आगतों में बीज, उर्वरक, सिंचाई, कीटनाशक, कृषि यंत्र आदि शामिल हैं। हरित क्रांति के तहत इन आगतों के व्यापक प्रयोग से भारत में खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।

  • भारत की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • स्वतंत्रता के समय कृषि की स्थिति पिछड़ी हुई थी।
  • कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक विधियों की आवश्यकता थी।
  • कृषि आगतों का महत्व बढ़ा।
  • हरित क्रांति के माध्यम से कृषि में बदलाव आया।
  • 📌 कृषि आगत: वे सभी साधन जो कृषि उत्पादन में सहायक होते हैं, जैसे बीज, खाद, सिंचाई आदि।
  • 📌 हरित क्रांति: 1960 के दशक में कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि की प्रक्रिया।

कृषि आगतों का विकास

व्याख्या

कृषि आगतों का विकास

इस अनुभाग में कृषि आगतों के विकास की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है। कृषि आगतों में मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक, सिंचाई के साधन, कृषि यंत्र आदि शामिल हैं। स्वतंत्रता के पश्चात् सरकार ने कृषि विकास के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाईं, जैसे सामुदायिक विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय विस्तार सेवा, और कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना। बीजों की गुणवत्ता सुधारने के लिए अनुसंधान संस्थान स्थापित किए गए। सिंचाई के लिए नहरें, ट्यूबवेल, कुएँ आदि का विकास हुआ। रासायनिक खादों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दी गई। कृषि यंत्रों के प्रयोग से श्रम की बचत और उत्पादकता में वृद्धि हुई। इन सभी उपायों से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।

  • कृषि आगतों में बीज, खाद, सिंचाई, यंत्र आदि शामिल हैं।
  • सरकार ने कृषि विकास के लिए कई योजनाएँ चलाईं।
  • बीज अनुसंधान संस्थानों की स्थापना की गई।
  • सिंचाई के साधनों का विस्तार हुआ।
  • रासायनिक खादों के उपयोग को बढ़ावा मिला।
  • कृषि यंत्रीकरण से उत्पादकता में वृद्धि हुई।
  • 📌 रासायनिक खाद: ऐसे पदार्थ जो भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए डाले जाते हैं।
  • 📌 कृषि यंत्रीकरण: कृषि कार्यों में मशीनों का प्रयोग।

हरित क्रांति का परिचय

अवधारणा

हरित क्रांति का परिचय

हरित क्रांति का तात्पर्य 1960 के दशक में भारत में कृषि उत्पादन में हुई तीव्र वृद्धि से है, जो मुख्यतः उच्च उत्पादकता वाले बीजों, रासायनिक खादों, सिंचाई, कीटनाशकों और कृषि यंत्रों के उपयोग से संभव हुई। हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन और नॉर्

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Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University

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1भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत विशेषताएँ
10 नोट्स
2आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व
11 नोट्स
3भारत की जनसंख्या एवं मानव विकास का सूचकांक
11 नोट्स
4कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy)
10 नोट्स
5निर्धनता
9 नोट्स
6औद्योगिक पिछड़ापन एवं असंतुलित विकास
9 नोट्स
7बेरोजगारी
9 नोट्स
8जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि (Population Explosion)
8 नोट्स
9भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में
10 नोट्स
10कृषि आगत एवं हरित क्रांति
वर्तमान
11राष्ट्रीय आय एवं प्रकृति तथा व्यक्तिगत आय का निर्धारण
10 नोट्स
12कृषि शाख : संस्थागत साख के विशेष संदर्भ में
8 नोट्स
13अर्थव्यवस्था की दोहरी प्रकृति (Dual Nature of Economy)
8 नोट्स
14भारत में खाद्य सुरक्षा
8 नोट्स
15भूमंडलीकरण एवं भारतीय कृषि
10 नोट्स

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