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बेरोजगारी

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

बेरोजगारी — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

5.1 बेरोजगारी का अर्थ

परिभाषा

5.1 बेरोजगारी का अर्थ

बेरोजगारी का अर्थ है - वह स्थिति जब कार्य करने योग्य, कार्य करने की इच्छा रखने वाले तथा कार्य की उपलब्धता के बावजूद व्यक्ति को कार्य नहीं मिलता। यह एक सामाजिक-आर्थिक समस्या है, जो देश के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। बेरोजगारी केवल आय की कमी ही नहीं दर्शाती, बल्कि इससे व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान तथा जीवन-स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है। भारत जैसे विकासशील देशों में बेरोजगारी की समस्या अत्यंत गंभीर है। यह समस्या ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में पाई जाती है, परंतु इसके स्वरूप भिन्न-भिन्न होते हैं। बेरोजगारी के कई प्रकार होते हैं, जैसे - खुली बेरोजगारी, छिपी बेरोजगारी, मौसमी बेरोजगारी, अल्प-रोजगारी आदि।

  • बेरोजगारी का अर्थ है - कार्य करने योग्य व्यक्ति को कार्य न मिलना।
  • यह समस्या ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • बेरोजगारी के कई प्रकार होते हैं।
  • यह देश की आर्थिक प्रगति में बाधक है।
  • बेरोजगारी से सामाजिक असंतोष बढ़ता है।
  • 📌 बेरोजगारी: कार्य करने योग्य व्यक्ति को कार्य न मिलना।
  • 📌 रोजगार: आय अर्जित करने के लिए किया गया कार्य।

5.2 बेरोजगारी के प्रकार

अवधारणा

5.2 बेरोजगारी के प्रकार

बेरोजगारी के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो समाज की संरचना, आर्थिक गतिविधियों एवं क्षेत्र के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं। भारत में मुख्यतः निम्नलिखित प्रकार की बेरोजगारी पाई जाती है: 1. खुली बेरोजगारी: जब कार्य करने योग्य व्यक्ति को कोई भी कार्य नहीं मिलता, तो उसे खुली बेरोजगारी कहते हैं। 2. छिपी बेरोजगारी: जब एक कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों और उनकी उत्पादकता शून्य हो, तो उसे छिपी बेरोजगारी कहते हैं। यह मुख्यतः कृषि क्षेत्र में पाई जाती है। 3. मौसमी बेरोजगारी: जब वर्ष के कुछ विशेष महीनों में ही कार्य उपलब्ध हो और बाकी समय बेरोजगारी रहे, तो उसे मौसमी बेरोजगारी कहते हैं। 4. अल्प-रोजगारी: जब व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार पूर्ण कार्य नहीं कर पाता, तो उसे अल्प-रोजगारी कहते हैं। 5. शिक्षित बेरोजगारी: जब शिक्षित व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार कार्य नहीं मिलता, तो उसे शिक्षित बेरोजगारी कहते हैं।

  • खुली बेरोजगारी में व्यक्ति को कोई भी कार्य नहीं मिलता।
  • छिपी बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में अधिक पाई जाती है।
  • मौसमी बेरोजगारी कृषि एवं अन्य मौसमी उद्योगों में होती है।
  • अल्प-रोजगारी में व्यक्ति अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाता।
  • शिक्षित बेरोजगारी शहरी क्षेत्रों में अधिक देखी जाती है।
  • 📌 खुली बेरोजगारी: कार्य न मिलना।
  • 📌 छिपी बेरोजगारी: आवश्यकता से अधिक लोग कार्य में लगे हों।
  • 📌 मौसमी बेरोजगारी: मौसम के अनुसार कार्य की उपलब्धता।

5.3 भारत में बेरोजगारी की स्थिति

व्याख्या

5.3 भारत में बेरोजगारी की स्थिति

भारत में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। देश की बड़ी जनसंख्या, सीमित संसाधन, शिक्षा की गुणवत्ता में कमी, और आर्थिक विकास की असमानता के कारण बेरोजगारी की दर अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी और मौसमी बेरोजगारी प्रमुख है, जबकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षि

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Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University

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2आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व
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