Ch 15निःशुल्क

वितरण का सीमांत उत्पादकता सिद्धांत

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Micro Economic Theory (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

वितरण का सीमांत उत्पादकता सिद्धांत — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में वितरण के सीमांत उत्पादकता सिद्धांत का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। वितरण का अर्थ है—उत्पादन के विभिन्न साधनों (जैसे भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यमिता) के बीच उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य का बँटवारा। सीमांत उत्पादकता सिद्धांत, वितरण का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जो बताता है कि प्रत्येक उत्पादन कारक को उसकी सीमांत उत्पादकता के अनुसार पारिश्रमिक मिलता है। यह सिद्धांत मुख्यतः प्रतिस्पर्धात्मक बाजार की स्थितियों में लागू होता है। इस सिद्धांत का विकास 19वीं शताब्दी के अंत में हुआ और इसे जे.बी. क्लार्क, मार्शल, वाल्रास आदि अर्थशास्त्रियों ने प्रतिपादित किया। इस सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि श्रम, भूमि, पूंजी आदि को उनकी सीमांत उत्पादकता के अनुसार पारिश्रमिक क्यों और कैसे मिलता है।

  • वितरण का अर्थ उत्पादन के साधनों के बीच आय का बँटवारा है।
  • सीमांत उत्पादकता सिद्धांत उत्पादन कारकों के पारिश्रमिक निर्धारण को स्पष्ट करता है।
  • यह सिद्धांत प्रतिस्पर्धात्मक बाजार की स्थितियों में लागू होता है।
  • सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक कारक को उसकी सीमांत उत्पादकता के बराबर पारिश्रमिक मिलता है।
  • इस सिद्धांत का विकास 19वीं शताब्दी के अंत में हुआ।
  • 📌 वितरण: उत्पादन के साधनों के बीच आय का बँटवारा।
  • 📌 सीमांत उत्पादकता: किसी कारक की एक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग से कुल उत्पाद में होने वाली वृद्धि।

सीमांत उत्पादकता सिद्धांत का अर्थ एवं परिभाषा

परिभाषा

सीमांत उत्पादकता सिद्धांत का अर्थ एवं परिभाषा

इस अनुभाग में सीमांत उत्पादकता सिद्धांत की संपूर्ण परिभाषा, अर्थ और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि दी गई है। सीमांत उत्पादकता सिद्धांत के अनुसार, किसी उत्पादन कारक (जैसे श्रम, भूमि, पूंजी) की पारिश्रमिक दर उसकी सीमांत उत्पादकता द्वारा निर्धारित होती है। सीमांत उत्पादकता वह अतिरिक्त उत्पाद है, जो किसी कारक की एक अतिरिक्त इकाई के प्रयोग से प्राप्त होता है, जबकि अन्य कारकों की मात्रा स्थिर रखी जाती है। जे.बी. क्लार्क के अनुसार, 'हर कारक को उसकी सीमांत उत्पादकता के बराबर पारिश्रमिक मिलता है।' इस सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में कारकों का पारिश्रमिक कैसे निर्धारित होता है।

  • सीमांत उत्पादकता सिद्धांत के अनुसार, कारक को उसकी सीमांत उत्पादकता के बराबर पारिश्रमिक मिलता है।
  • सीमांत उत्पादकता: कुल उत्पाद में एक अतिरिक्त कारक इकाई से होने वाली वृद्धि।
  • सिद्धांत का विकास जे.बी. क्लार्क, मार्शल आदि ने किया।
  • यह सिद्धांत प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में लागू होता है।
  • सभी कारकों की सीमांत उत्पादकता उनके पारिश्रमिक निर्धारण का आधार है।
  • 📌 सीमांत उत्पादकता सिद्धांत: कारकों के पारिश्रमिक निर्धारण का सिद्धांत, जो सीमांत उत्पादकता पर आधारित है।
  • 📌 सीमांत उत्पादकता (Marginal Productivity): अतिरिक्त कारक इकाई से होने वाली कुल उत्पाद में वृद्धि।

सीमांत उत्पादकता सिद्धांत की मुख्य मान्यताएँ

अवधारणा

सीमांत उत्पादकता सिद्धांत की मुख्य मान्यताएँ

इस अनुभाग में सीमांत उत्पादकता सिद्धांत की प्रमुख मान्यताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। सिद्धांत के सही निष्कर्ष के लिए कुछ आवश्यक शर्तें होती हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं: 1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा: कारक बाजार और उत्पाद बाजार दोनों में पूर्

SLM - Micro Economic Theory (Hindi) के सभी 17 अध्याय

Micro Economic Theory · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1अर्थशास्त्र : परिचय एवं आर्थिक विश्लेषण की विधियाँ
9 नोट्स
2अर्थशास्त्र की केंद्रीय समस्याएँ
10 नोट्स
3उपभोक्ता का व्यवहार/उपयोगिता विश्लेषण
10 नोट्स
4उपभोक्ता की संतुलनता
10 नोट्स
5उदासीनता वक्र : विशेषताएँ, उपभोक्ता का संतुलन
8 नोट्स
6उदासीनता वक्र : आय उपभोग वक्र, कीमत उपभोग वक्र, आय और
9 नोट्स
7उदासीनता वक्र : मांग वक्र का निर्माण
10 नोट्स
8मांग एवं पूर्ति की लोच की अवधारणा एवं मापन, आय लोच, क्रॉस लोच
11 नोट्स
9उत्पादन फलन और परिवर्तनशील अनुपात का नियम
8 नोट्स
10समउत्पाद वक्र, साधनों का न्यूनतम लागत संयोग एवं पैमाने के
9 नोट्स
11लागत वक्र एवं आगम वक्र
9 नोट्स
12पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्पादन तथा कीमत का निर्धारण
9 नोट्स
13एकाधिकार एवं कीमत विभेद
9 नोट्स
14एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता
8 नोट्स
15वितरण का सीमांत उत्पादकता सिद्धांत
वर्तमान

2 और अध्याय — सभी देखें →