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राजस्थान में किसान आन्दोलन : बिजौलिया एवं शेखावाटी

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of Rajasthan (Earliest Time to 1956 AD) (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट

राजस्थान में किसान आन्दोलन : बिजौलिया एवं शेखावाटी — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय का परिचय राजस्थान में किसान आन्दोलन के इतिहास को प्रस्तुत करता है, विशेषकर बिजौलिया एवं शेखावाटी क्षेत्रों में हुए प्रमुख किसान आंदोलनों की चर्चा करता है। राजस्थान के किसान आन्दोलन का उद्भव ब्रिटिश शासन और स्थानीय जागीरदारों की शोषणकारी नीतियों के विरोध में हुआ। किसानों को भारी लगान, बेगार, अन्यायपूर्ण करों और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था। इस पृष्ठभूमि में बिजौलिया और शेखावाटी के किसान आंदोलनों ने राजस्थान के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अध्याय में इन आंदोलनों के कारण, स्वरूप, नेतृत्व, प्रमुख घटनाएँ, और उनके परिणामों का विश्लेषण किया गया है।

  • राजस्थान में किसान आन्दोलन का मुख्य कारण शोषणकारी नीतियाँ थीं।
  • बिजौलिया और शेखावाटी क्षेत्र आन्दोलन के केंद्र रहे।
  • किसानों पर भारी लगान, बेगार और अन्य करों का बोझ था।
  • आन्दोलन ने राजस्थान के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया।
  • आन्दोलन के नेतृत्व में कई स्थानीय नेता शामिल थे।
  • अध्याय में आन्दोलन के कारण, स्वरूप और परिणामों का विश्लेषण किया गया है।
  • 📌 किसान आन्दोलन: किसानों द्वारा शोषण के विरुद्ध किया गया सामूहिक संघर्ष।
  • 📌 बेगार: बिना वेतन के जबरन श्रम करवाना।

बिजौलिया किसान आन्दोलन: पृष्ठभूमि

व्याख्या

बिजौलिया किसान आन्दोलन: पृष्ठभूमि

बिजौलिया किसान आन्दोलन राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया क्षेत्र में प्रारंभ हुआ। इस आन्दोलन की पृष्ठभूमि में जागीरदारों द्वारा किसानों पर लगाए गए अत्यधिक कर, बेगार, और अन्य शोषणकारी व्यवस्थाएँ थीं। बिजौलिया क्षेत्र में किसानों को 'लगान', 'लाटा', 'चरी', 'पेशक', 'बिजनी', 'बड़' आदि करों का भुगतान करना पड़ता था। किसानों से जबरन बेगार ली जाती थी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी। जागीरदारों की मनमानी और प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता ने किसानों को संगठित होकर आन्दोलन करने के लिए प्रेरित किया।

  • बिजौलिया क्षेत्र में किसानों पर कई प्रकार के कर लगाए गए थे।
  • बेगार प्रथा के कारण किसानों का शोषण होता था।
  • जागीरदारों की मनमानी और प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता प्रमुख कारण थे।
  • किसानों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आन्दोलन की पृष्ठभूमि में सामाजिक और आर्थिक शोषण था।
  • किसानों ने संगठित होकर आन्दोलन प्रारंभ किया।
  • 📌 लाटा: उपज का हिस्सा जागीरदार को देना।
  • 📌 पेशक: विशेष कर जो किसानों से लिया जाता था।

बिजौलिया किसान आन्दोलन: प्रारंभ और नेतृत्व

व्याख्या

बिजौलिया किसान आन्दोलन: प्रारंभ और नेतृत्व

बिजौलिया किसान आन्दोलन का प्रारंभ 1897 ई. में हुआ, जब किसानों ने जागीरदारों की शोषणकारी नीतियों के विरोध में संगठित होकर आवाज उठाई। आन्दोलन का नेतृत्व विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, माणिक्यलाल वर्मा आदि ने किया। विजय सिंह पथिक ने आन्दोलन को संगठित

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1राजस्थान इतिहास के स्रोत
10 नोट्स
2प्रागैतिहासिक राजस्थान
9 नोट्स
3कालीबंगा, आहाड़ और बयाना के सन्दर्भ में प्रागैतिहासिक एवं ऐतिहासिक
9 नोट्स
4जनपद युगीन राजस्थान
9 नोट्स
5राजपूत की उत्पत्ति
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6पृथ्वीराज चौहान की विजय एवं उसका युग
9 नोट्स
7महाराणा कुम्भा, राणा सांगा, एवं महाराणा प्रताप के अधीन मेवाड़
10 नोट्स
8राजपूत — मुगल सम्बन्ध, आमेर के मानसिंह, बीकानेर के रायसिंह
10 नोट्स
9मध्यकालीन राजस्थान में कला, स्थापत्य, एवं चित्रकला
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12राजस्थान में ब्रिटिश प्रभुसत्ता की स्थापना — सन् 1817-18 ई. की संधियाँ
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13Chapter 13
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14राजस्थान में किसान आन्दोलन : बिजौलिया एवं शेखावाटी
वर्तमान
15गोविन्दगुरु एवं मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में राजस्थान में आदिवासी
10 नोट्स
16राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन में जामडोल का योगदान-मेवाड़
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17राजपूताना की रियासतों का विलय तथा राजस्थान राज्य का निर्माण
9 नोट्स

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