NCERTCh 13निःशुल्क

विष्णु खरे – सत्य

🎓 Class 12📖 Antra📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट

विष्णु खरे – सत्य — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भीष्म साहनी

व्याख्या

भीष्म साहनी

भीष्म साहनी का जन्म सन् 1915 में रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई और बाद में उन्होंने स्कूल में उर्दू और अंग्रेज़ी का अध्ययन किया। उन्होंने गवर्नमेंट कालेज लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया और पंजाब विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। विभाजन से पूर्व भीष्म साहनी ने व्यापार के साथ-साथ मानद अध्यापन भी किया। विभाजन के बाद वे प्रतिकारिता, इप्टा नाटक मंडली से जुड़े और मुंबई में बेरोजगार भी रहे। बाद में अंबाला और अमृतसर के कॉलेजों में अध्यापन किया। अंततः दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में साहित्य का अध्यापन किया। भीष्म साहनी ने लगभग सात वर्ष मास्को के विदेशी भाषा प्रकाशन गृह में अनुवादक के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने रूसी भाषा का अध्ययन किया और लगभग दो दर्जन रूसी पुस्तकों का अनुवाद किया। वे प्रगतिशील लेखक संघ और अफ्रो-एशियाई लेखक संघ से भी जुड़े रहे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'भाग्यरेखा', 'पहला पाठ', 'भटकती राख', 'पटरियाँ', 'वाङ्चू', 'शोभायात्रा', 'निशाचर', 'पाली', 'डायन', 'झरोखे', 'कड़ियाँ', 'तमस', 'बसंती', 'मध्यादास की माड़ी', 'कुंतो', 'नीलू नीलिमा नीलोफर', 'माधवी', 'हानूश', 'कबिरा खड़ा बजार में', 'मुआवजे', तथा बालोपयोगी कहानियाँ 'गुलेल का खेल' आदि शामिल हैं। उनके उपन्यास 'तमस' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिंदी अकादमी, दिल्ली ने उन्हें शालाका सम्मान से नवाजा। उनकी भाषा में उर्दू शब्दों का प्रयोग विषय को आत्मीयता प्रदान करता है और पंजाबी भाषा की सांधी महक भी महसूस होती है। साहनी जी छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करके विषय को प्रभावी एवं रोचक बनाते हैं। संवादों का प्रयोग वर्णन में ताजगी लाता है।

  • भीष्म साहनी का जन्म 1915 में रावलपिंडी में हुआ।
  • उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  • विभाजन के बाद वे विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अध्यापन करते रहे।
  • मास्को में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह में अनुवादक के रूप में कार्य किया।
  • प्रगतिशील लेखक संघ और अफ्रो-एशियाई लेखक संघ से जुड़े रहे।
  • उनकी प्रमुख कृतियाँ 'तमस', 'भाग्यरेखा', 'मेरा भाई बलराज' आदि हैं।
  • 📌 प्रगतिशील लेखक संघ: एक साहित्यिक संगठन जो सामाजिक न्याय और प्रगति के लिए काम करता है।
  • 📌 पी.एच.डी.: डॉक्टरेट की उच्चतम शैक्षणिक उपाधि।
  • 📌 अनुवादक: एक ऐसा व्यक्ति जो एक भाषा से दूसरी भाषा में साहित्य का अनुवाद करता है।

पाठ का परिचय

व्याख्या

पाठ का परिचय

यह पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' से लिया गया एक संस्मरण है जिसमें लेखक ने अपने किशोरावस्था से प्रौढ़ावस्था तक के अनुभवों को साझा किया है। इसमें सेवाग्राम में गांधी जी का सान्निध्य, कश्मीर में नेहरू जी के साथ बिताए गए पल, तथा फिलिस्तीन में यास्सेर अराफात के साथ अनुभवों का वर्णन है। पाठ में लेखक ने अपने अनुभवों को प्रभावशाली शब्द चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया है जिससे पाठक को न केवल लेखक के व्यक्तित्व की झलक मिलती है, बल्कि राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री जैसे महत्वपूर्ण विषय भी उजागर होते हैं। पाठ की भाषा सरस, रोचक और सहज है, जो पाठकों को बांधे रखती है। यह संस्मरण केवल व्यक्तिगत अनुभवों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उस युग की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का भी दर्पण है जिसमें लेखक ने जीवन बिताया। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थी गांधी, नेहरू और अराफात जैसे महापुरुषों के व्यक्तित्व और उनके आदर्शों को समझ सकते हैं।

  • पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' का अंश है।
  • लेखक ने अपने जीवन के विभिन्न चरणों के अनुभव साझा किए हैं।
  • सेवाग्राम में गांधी जी, कश्मीर में नेहरू जी और फिलिस्तीन में अराफात के साथ अनुभव शामिल हैं।
  • पाठ में राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री के विषय उजागर होते हैं।
  • भाषा सरल, रोचक और प्रभावशाली है।
  • 📌 आत्मकथा: स्वयं के जीवन का लेखा-जोखा।
  • 📌 संस्मरण: किसी व्यक्ति के जीवन के अनुभवों का वर्णन।
  • 📌 राष्ट्रीयता: अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण।

सेवाग्राम में गांधी जी का सान्निध्य

व्याख्या

सेवाग्राम में गांधी जी का सान्निध्य

लेखक अपने भाई बलराज के पास सेवाग्राम जाते हैं, जहाँ बलराज 'नयी तालीम' पत्रिका के सह-संपादक थे। यह सन् 1938 के आसपास की घटना है। लेखक वर्धा स्टेशन से ताँगे में बैठकर सेवाग्राम पहुँचते हैं, जहाँ की कच्ची सड़कें और घुप्प अंधेरा उन्हें मिलते हैं। लेखक क

अभ्यास प्रश्न — विष्णु खरे – सत्य

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?

उत्तर:

लेखक सेवाग्राम गांधी जी के आश्रम में गया था। वह वहाँ इसलिए गया था क्योंकि उसे गांधी जी के साथ चलने का अनुभव प्राप्त करना था और वह उनके विचारों तथा कार्यों को समझना चाहता था। सेवाग्राम में जाकर लेखक ने गांधी जी के जीवन और उनके आदर्शों को करीब से देखा।

व्याख्या:

लेखक ने अपने संस्मरण में बताया है कि सेवाग्राम जाने का उद्देश्य गांधी जी के साथ रहकर उनके जीवन दर्शन को समझना था। यह अनुभव लेखक के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे उसे गांधी जी के व्यक्तित्व और उनके कार्यों की गहराई से जानकारी मिली।

EasyNCERT
Q2.2. लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा?

उत्तर:

लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव बहुत ही प्रेरणादायक और सकारात्मक था। उन्होंने देखा कि गांधी जी बहुत ही सरल, दयालु और अनुशासित व्यक्ति हैं। गांधी जी का व्यवहार रोगी बालक के प्रति भी बहुत सहानुभूतिपूर्ण था, जिससे लेखक प्रभावित हुआ। यह अनुभव लेखक के लिए एक नई सोच और दृष्टिकोण लेकर आया।

व्याख्या:

लेखक ने अपने संस्मरण में गांधी जी के साथ बिताए गए समय का उल्लेख करते हुए बताया कि गांधी जी का व्यवहार सभी के प्रति समान और प्रेमपूर्ण था। उनका पहला अनुभव गांधी जी के आदर्शों और उनके व्यवहार की महानता को समझने वाला था।

MediumNCERT
Q3.3. लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन लोगों के आने का जिक्र किया है?

उत्तर:

लेखक ने अपने संस्मरण में सेवाग्राम में कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आने का उल्लेख किया है। इनमें गांधी जी के अनुयायी, विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता, और राजनीतिक नेता शामिल थे। विशेष रूप से नेहरू जी का भी उल्लेख है, जो सेवाग्राम आए थे। इसके अलावा, लेखक ने अराफात के आतिथ्य प्रेम और अन्य अतिथियों का भी जिक्र किया है।

व्याख्या:

लेखक ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि सेवाग्राम एक ऐसा स्थान था जहाँ विभिन्न विचारधाराओं और व्यक्तित्वों के लोग आते थे, जो गांधी जी के आदर्शों से प्रभावित थे। यह विविधता लेखक के लिए ज्ञानवर्धक थी।

MediumNCERT
Q4.4. रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार का था?

उत्तर:

गांधी जी का रोगी बालक के प्रति व्यवहार बहुत ही दयालु, सहानुभूतिपूर्ण और प्रेमपूर्ण था। उन्होंने बालक की पीड़ा को समझा और उसे सांत्वना दी। गांधी जी की यह संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी।

व्याख्या:

लेखक ने बताया कि गांधी जी हर जीव के प्रति करुणा रखते थे। बालक के प्रति उनका व्यवहार इस बात का प्रमाण है कि वे केवल राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील मानव भी थे।

EasyNCERT
Q5.5. काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया?

उत्तर:

काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का बहुत ही आदर और सम्मान के साथ स्वागत किया। वे नेहरू जी को अपने नेता के रूप में मानते थे और उनके प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते थे। स्वागत में उनकी भावनाएँ और आतिथ्य प्रेम स्पष्ट रूप से झलकता था।

व्याख्या:

लेखक ने अपने संस्मरण में उल्लेख किया है कि काश्मीर के लोगों का नेहरू जी के प्रति प्रेम और सम्मान उनके स्वागत के तरीके से स्पष्ट था। यह स्वागत नेहरू जी के व्यक्तित्व की लोकप्रियता को दर्शाता है।

MediumNCERT
Q6.6. अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता स्पष्ट होती है?

उत्तर:

अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की विनम्रता, सहजता और सामान्य लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता स्पष्ट होती है। वे अपने पद और प्रतिष्ठा के बावजूद सरल और सहज व्यवहार करते थे।

व्याख्या:

लेखक ने बताया कि नेहरू जी ने अखबार की घटना में दिखाया कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामान्य और दयालु व्यक्ति भी हैं। उनकी यह विशेषता उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती थी।

MediumNCERT
Q7.7. फ़िलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया बहुत सहानुभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा क्यों था?

उत्तर:

भारत का फ़िलिस्तीन के प्रति रवैया सहानुभूतिपूर्ण और समर्थन भरा था क्योंकि भारत ने अपने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य देशों के संघर्षों को समझा और उनका समर्थन किया। भारत ने फ़िलिस्तीन के लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को सम्मान दिया और उन्हें समर्थन दिया।

व्याख्या:

लेखक ने बताया कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई ने उसे अन्य देशों के संघर्षों के प्रति संवेदनशील बनाया। इसलिए भारत ने फ़िलिस्तीन के लोगों के अधिकारों के लिए सहानुभूति और समर्थन व्यक्त किया।

MediumNCERT
Q8.8. अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबंधित किन्हीं दो घटनाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबंधित दो घटनाएँ इस प्रकार हैं: (i) अराफात ने अपने अतिथियों का बड़े आदर और सम्मान के साथ स्वागत किया और उनकी हर सुविधा का ध्यान रखा। (ii) उन्होंने अपने अतिथियों के लिए विशेष भोजन और आराम की व्यवस्था की, जिससे वे सहज और प्रसन्न महसूस करें। इन घटनाओं से अराफात के आतिथ्य प्रेम और उनकी मेहमाननवाजी की भावना स्पष्ट होती है।

व्याख्या:

लेखक ने अराफात के व्यवहार का वर्णन करते हुए बताया कि वे अपने अतिथियों का सम्मान और सेवा करने में पीछे नहीं रहते थे। उनकी यह विशेषता उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण पहचान है।

MediumNCERT

विष्णु खरे – सत्य — अध्ययन गाइड व लेख