Ch 17निःशुल्क

भारत में औद्योगिक विकास

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

भारत में औद्योगिक विकास — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

12.1 औद्योगीकरण का अर्थ और महत्त्व

व्याख्या

12.1 औद्योगीकरण का अर्थ और महत्त्व

औद्योगीकरण का अर्थ है – किसी देश की अर्थव्यवस्था में उद्योगों की संख्या, उत्पादन और विविधता में वृद्धि। औद्योगीकरण से आशय केवल कारखानों की स्थापना नहीं है, बल्कि यह कृषि, व्यापार, परिवहन, संचार आदि क्षेत्रों में भी परिवर्तन लाता है। औद्योगीकरण के महत्त्व को समझना आवश्यक है क्योंकि यह आर्थिक विकास का प्रमुख स्रोत है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है, और देश की आत्मनिर्भरता बढ़ती है। भारत में औद्योगीकरण ने सामाजिक और आर्थिक संरचना में बदलाव लाया है। औद्योगीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में शहरीकरण, शिक्षा का प्रसार, जीवन-स्तर में सुधार, और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिला है। औद्योगीकरण के माध्यम से कच्चे माल का बेहतर उपयोग, पूंजी निर्माण, और निर्यात में वृद्धि होती है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। औद्योगीकरण के बिना कोई भी देश विकसित नहीं बन सकता। भारत में स्वतंत्रता के बाद औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी गई, जिससे देश की आर्थिक संरचना में विविधता आई और कृषि पर निर्भरता कम हुई।

  • औद्योगीकरण का अर्थ है – उद्योगों की संख्या, उत्पादन और विविधता में वृद्धि।
  • यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का स्रोत है।
  • औद्योगीकरण से कृषि, व्यापार, परिवहन आदि क्षेत्रों में भी परिवर्तन आता है।
  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में शहरीकरण, शिक्षा और जीवन-स्तर में सुधार लाता है।
  • औद्योगीकरण से पूंजी निर्माण और निर्यात में वृद्धि होती है।
  • स्वतंत्रता के बाद भारत ने औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी।
  • 📌 औद्योगीकरण: उद्योगों की स्थापना और विस्तार की प्रक्रिया।
  • 📌 आर्थिक विकास: उत्पादन, आय और जीवन-स्तर में वृद्धि।
  • 📌 आत्मनिर्भरता: अपने संसाधनों पर निर्भर होकर विकास करना।

12.2 भारत में औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

व्याख्या

12.2 भारत में औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत में औद्योगिक विकास का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है। प्राचीन भारत में वस्त्र, धातु, मिट्टी के बर्तन, आभूषण आदि के उद्योग प्रसिद्ध थे। मध्यकाल में भी भारत के हस्तशिल्प उत्पाद विश्व प्रसिद्ध थे। लेकिन औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत के पारंपरिक उद्योगों का पतन हुआ। अंग्रेजों ने भारत को कच्चे माल का स्रोत और अपने तैयार माल का बाजार बना दिया। इससे भारतीय उद्योगों को भारी क्षति पहुँची। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भारी उद्योगों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और लघु उद्योगों की स्थापना की गई। 1956 की औद्योगिक नीति संकल्प ने औद्योगिक विकास की दिशा तय की। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण के कारण औद्योगिक क्षेत्र में नई ऊर्जा आई।

  • प्राचीन भारत में हस्तशिल्प उद्योग विश्व प्रसिद्ध थे।
  • औपनिवेशिक काल में भारतीय उद्योगों का पतन हुआ।
  • स्वतंत्रता के बाद औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई।
  • पंचवर्षीय योजनाओं के तहत भारी उद्योगों की स्थापना हुई।
  • 1991 के बाद निजीकरण और उदारीकरण से औद्योगिक क्षेत्र में बदलाव आया।
  • औद्योगिक नीति संकल्प 1956 ने औद्योगिक विकास की दिशा तय की।
  • 📌 हस्तशिल्प उद्योग: हाथ से बनने वाले पारंपरिक उत्पाद।
  • 📌 औद्योगिक नीति संकल्प 1956: औद्योगिक विकास की दिशा तय करने वाली नीति।
  • 📌 पंचवर्षीय योजना: पाँच वर्षों के लिए बनाई गई आर्थिक विकास की योजना।

12.3 औद्योगिक संरचना

अवधारणा

12.3 औद्योगिक संरचना

औद्योगिक संरचना से तात्पर्य है – किसी देश में विभिन्न प्रकार के उद्योगों का संगठन, वितरण और उनका आपसी संबंध। भारत की औद्योगिक संरचना में तीन प्रमुख क्षेत्र हैं – (1) भारी उद्योग, (2) लघु एवं कुटीर उद्योग, और (3) सेवा उद्योग। भारी उद्योगों में इस्पात,

SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi) के सभी 17 अध्याय

Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University

विषय पृष्ठ →
1भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत विशेषताएँ
10 नोट्स
2आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व
11 नोट्स
3भारत की जनसंख्या एवं मानव विकास का सूचकांक
11 नोट्स
4कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था (Predominantly an Agricultural Economy)
10 नोट्स
5निर्धनता
9 नोट्स
6औद्योगिक पिछड़ापन एवं असंतुलित विकास
9 नोट्स
7बेरोजगारी
9 नोट्स
8जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि (Population Explosion)
8 नोट्स
9भारतीय कृषि : महत्व एवं प्रकृति, भारतीय अर्थव्यवस्था में
10 नोट्स
10कृषि आगत एवं हरित क्रांति
9 नोट्स
11राष्ट्रीय आय एवं प्रकृति तथा व्यक्तिगत आय का निर्धारण
10 नोट्स
12कृषि शाख : संस्थागत साख के विशेष संदर्भ में
8 नोट्स
13अर्थव्यवस्था की दोहरी प्रकृति (Dual Nature of Economy)
8 नोट्स
14भारत में खाद्य सुरक्षा
8 नोट्स
15भूमंडलीकरण एवं भारतीय कृषि
10 नोट्स

2 और अध्याय — सभी देखें →