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सामाजिक क्रियाएँ : सहयोग, प्रतियोगिता एवं संघर्ष

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Introductory Sociology (Hindi)📖 326 नोट्स⏱️ ~489 मिनट

सामाजिक क्रियाएँ : सहयोग, प्रतियोगिता एवं संघर्ष — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 326 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

इकाई-1: समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

व्याख्या

इकाई-1: समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

यह इकाई समाजशास्त्र के उद्भव, विकास और इसकी विषयवस्तु का विस्तृत परिचय देती है। समाजशास्त्र, समाज विज्ञानों में एक अपेक्षाकृत नया विषय है, जबकि राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि पुराने विषय हैं। समाजशास्त्र के उद्भव एवं विकास की कहानी लगभग 170 वर्ष पुरानी है। मनुष्य ने अपने परिवेश के बारे में सृष्टि रचना के साथ ही सोचना प्रारंभ कर दिया था। प्रारंभ में समाज को समझने के लिए धार्मिक दृष्टिकोण अपनाया जाता था, जिसमें यह माना जाता था कि मनुष्य और समाज का उद्गम परमात्मा ने किया है। यह दृष्टिकोण धार्मिक था और समाज का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन नहीं किया जाता था। वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक विकास के कारण समाज के प्रति वैज्ञानिक सोच विकसित हुई, जिससे समाजशास्त्र नामक विज्ञान का जन्म हुआ। समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में 1838 में फ्रांस में स्थापित किया गया, जिसका श्रेय फ्रांस के दार्शनिक अगस्त कॉम्ट को दिया जाता है। इस इकाई के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी निम्नलिखित बातों को समझ सकेंगे: - समाजशास्त्र की आवश्यकता क्यों हुई। - यूरोप के देशों में 18वीं व 19वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण घटनाएँ। - समाजशास्त्र के विकास का क्रम। - भारत में समाजशास्त्र का विकास, स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की स्थिति। - समाजशास्त्र विषय में अध्ययन किए जाने वाले तत्व। - वर्तमान युग में समाजशास्त्र की विषयवस्तु में जुड़े नए आयाम। इकाई की रूपरेखा: 1.0 उद्देश्य 1.1 प्रस्तावना 1.2 समाजशास्त्र के उद्भव एवं विकास की पृष्ठभूमि 1.2.1 यूरोप के देशों में राजनीतिक क्रान्तियां 1.2.2 औद्योगिक क्रान्ति 1.2.3 समाजवादी दृष्टिकोण 1.2.4 नगरीकरण की प्रक्रिया 1.2.5 धार्मिक परिवर्तन 1.2.6 विज्ञान का प्रभाव 1.3 भारत में समाजशास्त्र का विकास 1.3.1 स्वतंत्रता से पूर्व की स्थिति 1.3.2 स्वतंत्रता के बाद समाजशास्त्र का विकास 1.4 समाजशास्त्र की विषयवस्तु एवं अध्ययन क्षेत्र 1.4.1 समाजशास्त्र के संस्थापकों का दृष्टिकोण 1.4.2 परम्परागत विषयवस्तु 1.4.3 विषयवस्तु एवं अध्ययन क्षेत्र के नवीन आयाम 1.5 सारांश 1.6 बोध प्रश्न 1.7 बोध प्रश्नों के उत्तर 1.8 शब्दावली 1.9 सन्दर्भ ग्रन्थ

  • समाजशास्त्र एक नया समाज विज्ञान है, जिसकी उत्पत्ति 19वीं शताब्दी में हुई।
  • समाजशास्त्र के विकास में यूरोप की राजनीतिक, औद्योगिक, धार्मिक और वैज्ञानिक क्रांतियों का योगदान है।
  • समाजशास्त्र का संस्थापक अगस्त कॉम्ट को माना जाता है।
  • समाजशास्त्र के अध्ययन से समाज की संरचना, कार्य और विकास को समझा जा सकता है।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज के वैज्ञानिक अध्ययन का विषय।
  • 📌 विषयवस्तु: अध्ययन के अंतर्गत आने वाले विषय/क्षेत्र।
  • 📌 उद्भव: किसी विषय या वस्तु की उत्पत्ति।

1.0 उद्देश्य

व्याख्या

1.0 उद्देश्य

इस इकाई के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं को समझ सकेंगे: - समाजशास्त्र की आवश्यकता क्यों हुई, इसका कारण जान सकेंगे। - यूरोप के देशों में 18वीं और 19वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण घटनाओं को समझ पाएंगे। - समाजशास्त्र के विकास के क्रम का विश्लेषण कर सकेंगे। - भारत में समाजशास्त्र के विकास का उल्लेख कर सकेंगे। - भारत में स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात समाजशास्त्र की स्थिति को समझ सकेंगे। - समाजशास्त्र विषय में किन तत्वों का अध्ययन किया जाता है, इसे जान सकेंगे। - वर्तमान युग में समाजशास्त्र की विषयवस्तु में कौन से नए आयाम जुड़े हैं, इसकी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यह उद्देश्य विद्यार्थियों को समाजशास्त्र के उद्भव, विकास और अध्ययन क्षेत्र की समग्र समझ प्रदान करने के लिए निर्धारित किए गए हैं।

  • समाजशास्त्र की आवश्यकता और महत्व को समझना।
  • समाजशास्त्र के ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण करना।
  • भारत में समाजशास्त्र के विकास की स्थिति का ज्ञान प्राप्त करना।
  • समाजशास्त्र की विषयवस्तु और अध्ययन क्षेत्र के नए आयामों को जानना।
  • 📌 उद्देश्य: किसी कार्य या अध्ययन से प्राप्त होने वाले लक्ष्यों का संक्षिप्त विवरण।

1.1 प्रस्तावना

व्याख्या

1.1 प्रस्तावना

समाजशास्त्र, समाज विज्ञानों में एक नया विषय है। अन्य समाज विज्ञान जैसे राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि पुराने विषय हैं, जबकि समाजशास्त्र का उद्भव और विकास लगभग 170 वर्ष पूर्व हुआ। मनुष्य ने अपने आस-पास के परिवेश के बारे में सृष्टि रचना के

SLM - Introductory Sociology (Hindi) के सभी 16 अध्याय

Introductory Sociology · Vardhman Mahaveer Open University

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1समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु
9 नोट्स
2समाजशास्त्र की प्रकृति : वैज्ञानिक एवं मानवीय दृष्टिकोण
10 नोट्स
3समाजशास्त्र और अन्य सामाजिक विज्ञान
9 नोट्स
4डॉ. एस. एल. दोषी
345 नोट्स
5समाजशास्त्रीय अध्ययन में उपागम
327 नोट्स
6सामाजिक क्रिया
336 नोट्स
7मूल अवधारणाएँ : समाज, समुदाय, संस्कृति एवं संस्था
314 नोट्स
8परिस्थिति एवं भूमिका
9सामाजिक समूह : प्राथमिक एवं द्वितीयक
328 नोट्स
10सामाजिक मानदंड व मूल्य
323 नोट्स
11सामाजिक क्रियाएँ : सहयोग, प्रतियोगिता एवं संघर्ष
वर्तमान
12सामाजिक स्तरीकरण : अर्थ एवं आधार
298 नोट्स
13समाजीकरण : अर्थ, चरण एवं अभिकरण
315 नोट्स
14सामाजिक नियंत्रण : अर्थ, स्वरूप एवं साधन
15सामाजिक परिवर्तन : अर्थ एवं कारक
327 नोट्स

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