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सूरदास – पद

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सूरदास – पद — अध्ययन नोट्स

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जयशंकर प्रसाद

व्याख्या

जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के महान कवि, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार थे। उनका जन्म सन् 1889 में काशी (वाराणसी) में हुआ। विद्यालयी शिक्षा उन्होंने केवल आठवीं कक्षा तक प्राप्त की, लेकिन स्वाध्याय द्वारा उन्होंने संस्कृत, पालि, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं तथा साहित्य का गहन अध्ययन किया। वे इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र और पुरातत्व के भी प्रकांड विद्वान थे। प्रसाद जी की प्रकृति अत्यंत सौम्य, शांत और गंभीर थी। वे परनिंदा और आत्मस्तुति दोनों से दूर रहते थे। उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी, मूलतः वे कवि थे, परंतु उन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी, निबंध आदि साहित्यिक विधाओं में भी उत्कृष्ट रचनाएँ दीं। प्रसाद जी के साहित्य में राष्ट्रीय जागरण का स्वर प्रमुख है। विशेषकर उनके नाटकों में प्राचीन भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रस्तुत किया गया है। उनकी कविताओं और कहानियों में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की झलक मिलती है। उनकी प्रमुख रचनाओं में नाटक—अजातशत्रु, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, राजश्री, धूवस्वामिनी; उपन्यास—कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण); कहानी संग्रह—आँधी, इंद्रजाल, छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप; निबंध संग्रह—काव्य और कला तथा अन्य; कविताएँ—इराना, आँसू, लहर, कामायनी, कानन कुसुम, प्रेमपथिक आदि शामिल हैं। उनकी रचनाएँ भारतीय संस्कृति के गौरव और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करती हैं। जयशंकर प्रसाद का साहित्य आज भी हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

  • जयशंकर प्रसाद का जन्म 1889 में काशी में हुआ।
  • विद्यालयी शिक्षा आठवीं कक्षा तक, पर स्वाध्याय द्वारा गहन अध्ययन।
  • बहुमुखी प्रतिभा के धनी, कवि, नाटककार, उपन्यासकार, कहानीकार।
  • प्रसाद के साहित्य में राष्ट्रीय जागरण का प्रमुख स्वर।
  • प्रमुख रचनाएँ: अजातशत्रु, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, कामायनी आदि।
  • भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की झलक उनकी रचनाओं में।
  • 📌 राष्ट्रीय जागरण: देश की संस्कृति, इतिहास और स्वाभिमान के प्रति जागरूकता।
  • 📌 बहुमुखी प्रतिभा: विभिन्न साहित्यिक विधाओं में दक्षता।

देवसेना का गीत

व्याख्या

देवसेना का गीत

‘देवसेना का गीत’ जयशंकर प्रसाद के नाटक 'स्कंदगुप्त' से लिया गया है। देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है। हूणों के आक्रमण से आयार्वर्त संकट में है, और बंधुवर्मा सहित परिवार के सभी लोग वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। बची हुई देवसेना अपने भाई के स्वप्नों को साकार करने तथा राष्ट्रसेवा का ब्रत लिए हुए है। जीवन में देवसेना को स्कंदगुप्त की चाह थी, किंतु स्कंदगुप्त मालवा के धनकुबेर की कन्या (विजया) का स्वप्न देखते थे। जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त देवसेना को पाना चाहता है, किंतु तब तक देवसेना वृद्ध पर्णदत्त के साथ आश्रम में गाना गाकर भीख मांगती है और महादेवी की समाधि परिष्कृत करती है। जब स्कंदगुप्त के अनुनय-विनय पर देवसेना तैयार नहीं होती, तब वह आजीवन कुँवारा रहने का ब्रत ले लेता है। देवसेना कहती है—“हृदय की कोमल कल्पना सो जा! जीवन में जिसकी संभावना नहीं, जिसे द्वार पर आए हुए लौटा दिया था उसके लिए पुकार मचाना क्या तेरे लिए अच्छी बात है?” और तब वह गीत गाती है—‘आह! वेदना मिली विदाई!’ यह कविता देवसेना के जीवन के वेदनामय क्षणों को दर्शाती है। वह अपने यौवन के क्रियाकलापों को भ्रमवश किए गए कर्म मानती है और पश्चाताप स्वरूप आँसू बहाती है। उसके आसपास सबकी प्यासी निगाहें हैं, जिन्हें वह बचाने का प्रयास करती है। जीवन की पूँजी बचाने में असफलता उसकी वेदना है। प्रलय उसके जीवनरथ पर सवार है, फिर भी वह हार नहीं मानती। कविता में मनुष्य और प्रकृति के संबंधों को भी सुंदरता से व्यक्त किया गया है।

  • देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है।
  • हूणों के आक्रमण से परिवार के सभी लोग वीरगति को प्राप्त।
  • देवसेना राष्ट्रसेवा का ब्रत लिए हुए है।
  • स्कंदगुप्त से प्रेम, पर स्कंदगुप्त विजया का स्वप्न देखते हैं।
  • स्कंदगुप्त आजीवन कुँवारा रहने का ब्रत लेता है।
  • कविता में देवसेना की वेदना, पश्चाताप और जीवन संघर्ष का चित्रण।
  • 📌 वीरगति: वीरता से मृत्यु प्राप्त करना।
  • 📌 ब्रत: संकल्प या व्रत।
  • 📌 प्रलय: विनाश या अंत।

देवसेना का गीत – कविता पाठ

व्याख्या

देवसेना का गीत – कविता पाठ

यह कविता देवसेना के जीवन की वेदना और विदाई का भावपूर्ण चित्रण है। कविता की शुरुआत में देवसेना कहती है कि उसने भ्रमवश जीवन को साँचित माना और मधुकरियों की भीख लुटाई, अर्थात् जीवन की सच्चाई को समझने में गलती की। संध्या के श्रमकण छलछल कर आँसू की तरह गिरत

अभ्यास प्रश्न — सूरदास – पद

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.आधुनिक शहरी जीवन में वसंत ऋतु के आने की सूचना कैसे मिलती है?
A.कैलेंडर से
B.पियराए पत्ते से
C.अनुभव से
D.गरम हवा से

उत्तर:

कैलेंडर से

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Q2.‘दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल ‘ में कौन सा अलंकार है?
A.अनुप्रास
B.उपमा
C.उत्प्रेक्षा
D.यमक

उत्तर:

अनुप्रास

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Q3.प्रकृति से निरपेक्ष रहने के क्या कारण है?
A.शहरीकरण
B.जीवन की व्यस्तता
C.संवेदनहीनता
D.प्रकृति से अलगाव

उत्तर:

जीवन की व्यस्तता

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Q4.‘ वसंत आया’ कविता की विषयवस्तु क्या है?
A.प्रकृति का सौंदर्य
B.जीवन की व्यस्तता
C.मनुष्य का अकेलापन
D.प्रकृति से मनुष्य की दूरी

उत्तर:

प्रकृति से मनुष्य की दूरी

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Q5.‘लोग भूल गए हैं’ कविता संग्रह को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है?
A.व्यास सम्मान
B.शलाका सम्मान
C.साहित्य अकादमी सम्मान
D.हिन्दी अकादमी सम्मान

उत्तर:

साहित्य अकादमी सम्मान

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Q6.रघुवीर सहाय आधुनिक काल के किस काव्य धारा के कवि हैं?
A.प्रगतिवाद
B.नई कविता
C.प्रयोगवाद
D.साठोत्तरी कविता

उत्तर:

नई कविता

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Q7.शुक्ल जी का हिन्दी साहित्य के प्रति झुकाव के क्या कारण थे?
A.पिता का प्रभाव
B.कॉलेज का वातावरण
C.साथियों का प्रभाव
D.साहित्यिक परिवेश

उत्तर:

साहित्यिक परिवेश

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Q8.शुक्ल जी ने बालकों की मंडली क्यों जोड़ी थी?
A.नाटक देखने के लिए
B.रामलीला देखने के लिए
C.चौधरी जी का घर देखने के लिए
D.पिता से रामचरित मानस का पाठ सुनने के लिए

उत्तर:

चौधरी जी का घर देखने के लिए

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सूरदास – पद — अध्ययन गाइड व लेख