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Relational Model 48-70

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Data Base Management System (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 20Chapter 13

Relational Model 48-70 — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

5.1 रिलेशनल मॉडल का परिचय

व्याख्या

5.1 रिलेशनल मॉडल का परिचय

रिलेशनल मॉडल डाटा को तालिकाओं (टेबल्स) के रूप में संगठित करने की एक विधि है। इसे 1970 में डॉ. ई.एफ. कॉड ने प्रस्तुत किया था। इस मॉडल में डाटा को पंक्तियों (Rows) और स्तंभों (Columns) में विभाजित किया जाता है, जहाँ प्रत्येक तालिका को एक रिलेशन कहा जाता है। प्रत्येक पंक्ति एक ट्यूपल (Tuple) कहलाती है और प्रत्येक स्तंभ एक विशेषता (Attribute) होती है। रिलेशनल मॉडल डाटा को संरचित रूप में संग्रहित करने, पहुँचने और संशोधित करने के लिए एक मानकीकृत तरीका प्रदान करता है। इसमें डाटा की स्वतंत्रता, एकरूपता, और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। यह मॉडल डाटा की जटिलता को कम करता है और डाटा को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने में मदद करता है।

  • रिलेशनल मॉडल डाटा को तालिकाओं के रूप में संगठित करता है।
  • प्रत्येक तालिका में पंक्तियाँ और स्तंभ होते हैं।
  • प्रत्येक पंक्ति एक ट्यूपल कहलाती है।
  • प्रत्येक स्तंभ एक विशेषता होती है।
  • डाटा की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • डाटा की जटिलता को कम करता है।
  • 📌 रिलेशन (Relation): तालिका के रूप में संगठित डाटा।
  • 📌 ट्यूपल (Tuple): तालिका की एक पंक्ति।
  • 📌 विशेषता (Attribute): तालिका का एक स्तंभ।

5.2 रिलेशनल मॉडल की विशेषताएँ

अवधारणा

5.2 रिलेशनल मॉडल की विशेषताएँ

रिलेशनल मॉडल की मुख्य विशेषताएँ इसे अन्य डाटा मॉडल्स से अलग बनाती हैं। इसमें डाटा को तालिकाओं के रूप में संग्रहित किया जाता है, जिससे डाटा की संरचना और पहुँच आसान हो जाती है। प्रत्येक तालिका में डाटा के अद्वितीय रिकॉर्ड होते हैं, और प्रत्येक तालिका के लिए एक प्राथमिक कुंजी (Primary Key) निर्धारित की जाती है। रिलेशनल मॉडल में डाटा की स्वतंत्रता, एकरूपता, और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। यह मॉडल सामान्यीकरण (Normalization) का समर्थन करता है, जिससे डाटा की पुनरावृत्ति (Redundancy) कम होती है। साथ ही, रिलेशनल मॉडल में डाटा की अखंडता (Integrity) बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार की बाधाएँ (Constraints) लागू की जाती हैं।

  • डाटा तालिकाओं में संग्रहित होता है।
  • प्रत्येक तालिका में अद्वितीय रिकॉर्ड होते हैं।
  • प्राथमिक कुंजी डाटा की विशिष्टता सुनिश्चित करती है।
  • डाटा की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • सामान्यीकरण से डाटा की पुनरावृत्ति कम होती है।
  • डाटा अखंडता के लिए बाधाएँ लागू की जाती हैं।
  • 📌 प्राथमिक कुंजी (Primary Key): तालिका में प्रत्येक रिकॉर्ड की विशिष्ट पहचान।
  • 📌 सामान्यीकरण (Normalization): डाटा की पुनरावृत्ति कम करने की प्रक्रिया।
  • 📌 अखंडता बाधाएँ (Integrity Constraints): डाटा की शुद्धता और सुसंगतता बनाए रखने के नियम।

5.3 रिलेशनल मॉडल की कुंजीयाँ

परिभाषा

5.3 रिलेशनल मॉडल की कुंजीयाँ

रिलेशनल मॉडल में कुंजीयाँ तालिका के रिकॉर्ड की विशिष्ट पहचान के लिए प्रयोग की जाती हैं। मुख्यतः चार प्रकार की कुंजीयाँ होती हैं: प्राथमिक कुंजी (Primary Key), प्रत्याशी कुंजी (Candidate Key), वैकल्पिक कुंजी (Alternate Key), और विदेशी कुंजी (Foreign K