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मौर्य युगीन समाज, अर्थव्यवस्था, कला तथा अशोक का धर्म

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (Earliest Time to 1200 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

मौर्य युगीन समाज, अर्थव्यवस्था, कला तथा अशोक का धर्म — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

मौर्य साम्राज्य की स्थापना और विस्तार

व्याख्या

मौर्य साम्राज्य की स्थापना और विस्तार

मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ई.पू. में की थी। इस साम्राज्य की स्थापना के समय भारत में अनेक छोटे-छोटे राज्य थे, जिनमें आपसी संघर्ष चलते रहते थे। चंद्रगुप्त ने चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद वंश का अंत कर मगध की गद्दी पर अधिकार किया। मौर्य साम्राज्य का विस्तार चंद्रगुप्त, बिंदुसार और अशोक के शासनकाल में हुआ। चंद्रगुप्त ने उत्तर-पश्चिमी भारत के यूनानी शासक सेल्यूकस को हराकर अपने साम्राज्य में पंजाब और अफगानिस्तान के कुछ भागों को भी मिला लिया। बिंदुसार ने दक्षिण भारत के कर्नाटक तक साम्राज्य का विस्तार किया। अशोक के समय मौर्य साम्राज्य लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैल गया था। अशोक ने कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के बाद युद्ध नीति का त्याग कर 'धम्म' (धर्म) नीति को अपनाया।

  • मौर्य साम्राज्य की स्थापना 322 ई.पू. में चंद्रगुप्त मौर्य ने की।
  • चंद्रगुप्त ने चाणक्य की सहायता से मगध की सत्ता प्राप्त की।
  • मौर्य साम्राज्य का विस्तार उत्तर-पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी भारत तक हुआ।
  • अशोक के समय साम्राज्य सबसे अधिक विस्तृत था।
  • कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने अहिंसा और धर्म नीति को अपनाया।
  • 📌 मौर्य साम्राज्य: प्राचीन भारत का पहला विशाल और एकीकृत साम्राज्य।
  • 📌 कलिंग युद्ध: अशोक द्वारा लड़ा गया युद्ध, जिसके बाद उसने हिंसा का त्याग किया।

मौर्य युगीन समाज की संरचना

व्याख्या

मौर्य युगीन समाज की संरचना

मौर्य युग में समाज की संरचना जटिल थी, जिसमें वर्ण व्यवस्था प्रमुख थी। समाज ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्णों में विभाजित था। ब्राह्मणों का धार्मिक और शैक्षिक क्षेत्र में प्रभुत्व था, क्षत्रिय शासक और योद्धा थे, वैश्य व्यापार और कृषि से जुड़े थे, जबकि शूद्र सेवा कार्य करते थे। महिलाओं की स्थिति मिश्रित थी; कुछ क्षेत्रों में उन्हें सम्मान प्राप्त था, तो कहीं-कहीं वे सीमित अधिकारों तक सीमित थीं। समाज में दास प्रथा भी प्रचलित थी। नगरों में व्यापारियों, कारीगरों और श्रमिकों की बड़ी संख्या थी। समाज में जाति और पेशे के आधार पर वर्गीकरण स्पष्ट था।

  • समाज में वर्ण व्यवस्था का पालन होता था।
  • ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र – चार प्रमुख वर्ण थे।
  • महिलाओं की स्थिति मिश्रित थी; कुछ को अधिकार, कुछ को प्रतिबंध।
  • दास प्रथा और श्रमिक वर्ग की उपस्थिति थी।
  • नगरों में व्यापारियों और कारीगरों की संख्या बढ़ी।
  • 📌 वर्ण व्यवस्था: समाज का चार वर्गों में विभाजन।
  • 📌 दास प्रथा: लोगों को दास के रूप में रखना।

मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था

व्याख्या

मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था

मौर्य प्रशासन अत्यंत संगठित और केंद्रीकृत था। सम्राट सर्वोच्च शासक होता था, जिसके अधीन मंत्रिपरिषद, सेनापति, महामात्य, और अन्य अधिकारी होते थे। साम्राज्य को अनेक प्रांतों (जनपदों) में बाँटा गया था, जिनके प्रमुख 'कुमार' या 'महामात्य' होते थे। प्रत्येक

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1भारतीय इतिहास के अध्ययन के स्रोत
10 नोट्स
2पूर्व पाषाण, नवपाषाण तथा ताम्रपाषाणकालीन भारतीय संस्कृतियाँ
11 नोट्स
3सिंधु घाटी सभ्यता
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4वैदिक युग में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक जीवन
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5भारत में लौह एवं महापाषाण युगीन संस्कृतियाँ
10 नोट्स
6महाजनपद काल – नंद वंश तक मगध का उत्कर्ष
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7जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म
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8मौर्य साम्राज्य – उद्भव, विस्तार एवं प्रशासनिक व्यवस्था
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9मौर्य युगीन समाज, अर्थव्यवस्था, कला तथा अशोक का धर्म
वर्तमान
10इंडो-ग्रीक, शुंग, शक, कुषाण एवं सातवाहन
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11दक्षिण भारत : संगमकाल-साहित्य, समाज एवं राजनय
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12गुप्त साम्राज्य – I – राजनीति एवं शासन
10 नोट्स
13गुप्त साम्राज्य – II – समाज, अर्थव्यवस्था, साहित्य, कला और
9 नोट्स
14हर्ष युग
10 नोट्स
15त्रिपक्षीय संघर्ष – पाल, प्रतिहार, एवं राष्ट्रकूट
8 नोट्स

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