Ch 8निःशुल्क

अरस्तु

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Political Theory & Thought (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

अरस्तु — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में अरस्तु के जीवन, उनके समय और उनके राजनीतिक विचारों की पृष्ठभूमि का विस्तार से वर्णन किया गया है। अरस्तु का जन्म 384 ई. पू. में स्टैगीरा नामक नगर में हुआ था। वे प्लेटो के शिष्य थे और सिकंदर महान के गुरु भी रहे। अरस्तु ने एथेन्स में 'लिसियम' नामक विद्यालय की स्थापना की थी। वे पश्चिमी राजनीतिक विचारधारा के जनक माने जाते हैं। अरस्तु ने अपने विचारों में व्यावहारिकता, अनुभववाद और तर्कशक्ति का समावेश किया। उन्होंने राजनीति को 'व्यवहारिक विज्ञान' माना और राज्य की उत्पत्ति, उद्देश्य, नागरिकता, संविधान, न्याय, दासता, शिक्षा आदि विषयों पर विचार किया। अरस्तु की रचनाएँ 'पॉलिटिक्स', 'एथिक्स', 'रिटोरिक', 'पोएटिक्स' आदि हैं। उन्होंने राज्य को 'नैतिक विकास का साधन' बताया। उनके विचार आज भी राजनीतिक सिद्धांतों में प्रासंगिक हैं।

  • अरस्तु का जन्म 384 ई. पू. में स्टैगीरा में हुआ।
  • वे प्लेटो के शिष्य और सिकंदर के गुरु थे।
  • अरस्तु ने 'लिसियम' नामक विद्यालय की स्थापना की।
  • राजनीति को व्यवहारिक विज्ञान माना।
  • राज्य, नागरिकता, संविधान आदि पर विस्तृत विचार दिए।
  • उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
  • 📌 राज्य: समाज की सर्वोच्च संस्था, जो नागरिकों के नैतिक विकास के लिए कार्य करती है।
  • 📌 नागरिकता: राज्य के सदस्यों की वह स्थिति जिसमें वे अधिकार और कर्तव्य दोनों निभाते हैं।

अरस्तु की राजनीतिक विचारधारा का स्वरूप

अवधारणा

अरस्तु की राजनीतिक विचारधारा का स्वरूप

अरस्तु की राजनीतिक विचारधारा व्यावहारिकता, अनुभववाद और तर्कशक्ति पर आधारित है। उन्होंने राजनीति को नैतिकता और व्यावहारिकता का समन्वय माना। अरस्तु के अनुसार, राजनीति का उद्देश्य नागरिकों के नैतिक और बौद्धिक विकास को सुनिश्चित करना है। वे राज्य को प्राकृतिक संस्था मानते हैं, जो मनुष्य की सामाजिक प्रवृत्ति का परिणाम है। अरस्तु ने राज्य, संविधान, नागरिकता, न्याय, दासता, शिक्षा आदि विषयों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार किया। उन्होंने राज्य को 'नैतिकता की प्रयोगशाला' कहा। अरस्तु ने 'मध्य मार्ग' (Golden Mean) का सिद्धांत दिया, जिसमें अत्यधिक और न्यूनता दोनों से बचने की सलाह दी गई है। उनके अनुसार, राजनीति का अध्ययन व्यवहारिक अनुभव और तर्क के आधार पर होना चाहिए।

  • राजनीति को नैतिकता और व्यावहारिकता का समन्वय माना।
  • राज्य को प्राकृतिक संस्था बताया।
  • मध्य मार्ग का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • राज्य का उद्देश्य नागरिकों का नैतिक विकास है।
  • राजनीति का अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया।
  • व्यवहारिक अनुभव और तर्क को महत्व दिया।
  • 📌 मध्य मार्ग (Golden Mean): अत्यधिक और न्यूनता के बीच संतुलन की स्थिति।
  • 📌 प्राकृतिक राज्य: वह राज्य जो मानव की स्वाभाविक प्रवृत्ति से उत्पन्न होता है।

राज्य की उत्पत्ति और उद्देश्य

व्याख्या

राज्य की उत्पत्ति और उद्देश्य

अरस्तु के अनुसार राज्य की उत्पत्ति प्राकृतिक है। मनुष्य स्वभाव से सामाजिक प्राणी है, अतः वह समाज में रहना पसंद करता है। परिवार राज्य की प्रथम इकाई है, कई परिवार मिलकर ग्राम बनाते हैं और कई ग्राम मिलकर राज्य का निर्माण करते हैं। राज्य का उद्देश्य केवल