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मध्य पूर्व की राजनीति : I, इजरायल – फिलीस्तीन समस्या

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Contemporary International Relations (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

मध्य पूर्व की राजनीति : I, इजरायल – फिलीस्तीन समस्या — अध्ययन नोट्स

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8.1 मध्य पूर्व: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

व्याख्या

8.1 मध्य पूर्व: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मध्य पूर्व क्षेत्र विश्व राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है, क्योंकि यहां की घटनाएं वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालती हैं। मध्य पूर्व का क्षेत्र पश्चिमी एशिया, उत्तरी अफ्रीका और पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों को सम्मिलित करता है। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र विभिन्न साम्राज्यों जैसे ओटोमन, फारसी, रोम, और ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहा है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य का पतन हुआ और ब्रिटिश तथा फ्रांसीसी साम्राज्य ने क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लिया। इस समय कई कृत्रिम सीमाएं बनाई गईं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता उत्पन्न हुई। मध्य पूर्व में तेल की खोज ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। यहाँ के प्रमुख धर्मों—यहूदी, ईसाई, और इस्लाम—की उत्पत्ति भी इसी क्षेत्र में हुई है। इस क्षेत्र में धार्मिक, जातीय और राजनीतिक विविधता है, जो अक्सर संघर्ष का कारण बनती है।

  • मध्य पूर्व क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से कई साम्राज्य रहे हैं।
  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद क्षेत्र की सीमाएं कृत्रिम रूप से बनाई गईं।
  • तेल की खोज ने क्षेत्र को वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बना दिया।
  • यहूदी, ईसाई, और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति इसी क्षेत्र में हुई है।
  • धार्मिक और जातीय विविधता के कारण संघर्षों की संभावना अधिक रहती है।
  • 📌 मध्य पूर्व: पश्चिमी एशिया, उत्तरी अफ्रीका और पूर्वी यूरोप का क्षेत्र।
  • 📌 ओटोमन साम्राज्य: तुर्की आधारित साम्राज्य, जो प्रथम विश्व युद्ध तक मध्य पूर्व पर शासन करता था।

8.2 इजरायल-फिलिस्तीन समस्या: उत्पत्ति

व्याख्या

8.2 इजरायल-फिलिस्तीन समस्या: उत्पत्ति

इजरायल-फिलिस्तीन समस्या की उत्पत्ति 19वीं शताब्दी के अंत में शुरू हुई जब यहूदी लोगों ने 'ज़ायोनिज़्म' आंदोलन के तहत अपने ऐतिहासिक घर, फिलिस्तीन, में लौटने की मांग की। उस समय फिलिस्तीन क्षेत्र में मुख्यतः अरब लोग रहते थे। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश शासन के अधीन फिलिस्तीन आया। 1917 में 'बालफोर घोषणा' के तहत ब्रिटिश सरकार ने यहूदियों को फिलिस्तीन में राष्ट्रीय घर स्थापित करने की अनुमति दी। इसके बाद यहूदियों का फिलिस्तीन में आगमन बढ़ा और अरबों के साथ संघर्ष शुरू हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहूदियों की संख्या और बढ़ गई। 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो भागों—यहूदी और अरब—में बांटने का प्रस्ताव दिया। अरब देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। 1948 में इजरायल राज्य की स्थापना हुई, जिससे अरब-इजरायल युद्ध शुरू हुआ।

  • ज़ायोनिज़्म आंदोलन के तहत यहूदियों ने फिलिस्तीन लौटने की मांग की।
  • 1917 बालफोर घोषणा ने यहूदियों को फिलिस्तीन में बसने की अनुमति दी।
  • 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो भागों में बांटने का प्रस्ताव दिया।
  • 1948 में इजरायल राज्य की स्थापना हुई।
  • अरब देशों ने इजरायल की स्थापना का विरोध किया।
  • 📌 ज़ायोनिज़्म: यहूदी लोगों का आंदोलन, जिसमें वे अपने ऐतिहासिक घर फिलिस्तीन लौटना चाहते थे।
  • 📌 बालफोर घोषणा: ब्रिटिश सरकार की 1917 की घोषणा, जिसमें यहूदियों को फिलिस्तीन में बसने की अनुमति दी गई।

8.3 प्रमुख युद्ध और संघर्ष

व्याख्या

8.3 प्रमुख युद्ध और संघर्ष

इजरायल-फिलिस्तीन समस्या ने कई प्रमुख युद्धों और संघर्षों को जन्म दिया है। 1948 का अरब-इजरायल युद्ध, 1956 का स्वेज़ संकट, 1967 का छह-दिवसीय युद्ध, और 1973 का यौम किप्पूर युद्ध प्रमुख हैं। 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद अरब देशों ने इजरायल पर हमला क