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एक पृथ्वी अतिपरवलय की जनक रेखाएँ

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Co-ordinate Geometry and Mathematical Programming (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

एक पृथ्वी अतिपरवलय की जनक रेखाएँ — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

8.1 भूमिका

व्याख्या

8.1 भूमिका

इस अनुभाग में अतिपरवलय (Hyperbola) की अवधारणा, उसका महत्व तथा गणितीय ज्यामिति में उसकी भूमिका का परिचय दिया गया है। अतिपरवलय द्वितीय कोटि का एक महत्त्वपूर्ण वक्र है, जिसकी दो शाखाएँ होती हैं। यह वक्र उन बिंदुओं का स्थान है, जिनके दो नियत बिंदुओं (फोकस) से दूरी के अंतर का मान सदैव एक नियत संख्या के बराबर होता है। अतिपरवलय का अध्ययन गणित, भौतिकी, खगोलशास्त्र और इंजीनियरिंग में अत्यंत उपयोगी है। इस खंड में यह भी बताया गया है कि अतिपरवलय की जनक रेखाएँ (Directrices) और फोकस के साथ उसका संबंध क्या है। साथ ही, अतिपरवलय की सामान्य समीकरण, उसकी ज्यामितीय विशेषताएँ और उसके विभिन्न अनुप्रयोगों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

  • अतिपरवलय द्वितीय कोटि का एक वक्र है।
  • इसके दो फोकस और दो जनक रेखाएँ होती हैं।
  • अतिपरवलय के प्रत्येक बिंदु के लिए, दो फोकस से दूरी के अंतर का मान नियत रहता है।
  • इसकी दो शाखाएँ होती हैं, जो एक-दूसरे के विपरीत दिशा में फैली होती हैं।
  • अतिपरवलय का समीकरण केंद्र और अक्षों के सापेक्ष लिखा जाता है।
  • 📌 अतिपरवलय: द्वितीय कोटि का वक्र, जिसके प्रत्येक बिंदु के लिए दो फोकस से दूरी के अंतर का मान नियत होता है।
  • 📌 फोकस: वे नियत बिंदु, जिनके सापेक्ष अतिपरवलय की परिभाषा दी जाती है।
  • 📌 जनक रेखा: वह रेखा, जिसके सापेक्ष अतिपरवलय के बिंदुओं की दूरी और फोकस से दूरी का अनुपात नियत होता है।

8.2 अतिपरवलय का मानक समीकरण

सूत्र

8.2 अतिपरवलय का मानक समीकरण

इस अनुभाग में अतिपरवलय का मानक समीकरण केंद्र (0, 0) के सापेक्ष व्युत्पन्न किया गया है। यदि केंद्र मूल बिंदु पर है और मुख्य अक्ष x-अक्ष के साथ है, तो अतिपरवलय का समीकरण (x²/a²) − (y²/b²) = 1 होता है। यहाँ a और b वास्तविक धनात्मक संख्याएँ हैं, जहाँ a मुख्य अक्ष की अर्ध-लंबाई और b सहायक अक्ष की अर्ध-लंबाई है। समीकरण की व्युत्पत्ति में फोकस, जनक रेखा, और नियत अनुपात (e > 1) का प्रयोग किया गया है।

  • अतिपरवलय का मानक समीकरण केंद्र (0, 0) के सापेक्ष लिखा जाता है।
  • मुख्य अक्ष x-अक्ष के साथ होने पर समीकरण: (x²/a²) − (y²/b²) = 1
  • यह समीकरण द्वितीय कोटि का है।
  • a मुख्य अक्ष की अर्ध-लंबाई और b सहायक अक्ष की अर्ध-लंबाई है।
  • e (विषमितता) का मान 1 से अधिक होता है।
  • 📌 मुख्य अक्ष: वह अक्ष, जिसके साथ अतिपरवलय की शाखाएँ फैली होती हैं।
  • 📌 सहायक अक्ष: मुख्य अक्ष के लम्बवत् अक्ष।
  • 📌 विषमितता (e): फोकस से दूरी और जनक रेखा से दूरी का अनुपात।

8.3 अतिपरवलय की ज्यामितीय विशेषताएँ

अवधारणा

8.3 अतिपरवलय की ज्यामितीय विशेषताएँ

इस अनुभाग में अतिपरवलय की मुख्य ज्यामितीय विशेषताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। इनमें केंद्र, फोकस, जनक रेखाएँ, विषमितता, मुख्य और सहायक अक्ष, शीर्ष (Vertices), और आसमिताएँ (Asymptotes) सम्मिलित हैं। केंद्र वह बिंदु है, जहाँ से अतिपरवलय की दोनों