Ch 8निःशुल्क

एक पृथ्वी अतिपरवलय की जनक रेखाएँ

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Co-ordinate Geomatery and Mathematical Programming (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

एक पृथ्वी अतिपरवलय की जनक रेखाएँ — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

8.1 परिचय

व्याख्या

8.1 परिचय

इस अनुभाग में अतिपरवलय की जनक रेखाओं की अवधारणा का परिचय दिया गया है। अतिपरवलय (Hyperbola) द्विघातीय वक्रों में से एक है, जो दो निश्चित बिंदुओं (फोकस) से दूरी के अंतर के स्थिर होने की शर्त पर बनता है। जनक रेखाएँ (Directrices) अतिपरवलय के समीकरण को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस अध्याय में, हम अतिपरवलय की परिभाषा, उसके गुण, तथा जनक रेखाओं के साथ उसके संबंध को विस्तार से समझेंगे। साथ ही, हम समन्वय ज्यामिति (Co-ordinate Geometry) के माध्यम से अतिपरवलय का विश्लेषण करेंगे, जिससे गणितीय प्रोग्रामिंग में इसकी उपयोगिता स्पष्ट होगी।

  • अतिपरवलय द्विघातीय वक्रों का एक महत्वपूर्ण प्रकार है।
  • जनक रेखाएँ अतिपरवलय के समीकरण को निर्धारित करने में सहायक होती हैं।
  • अतिपरवलय की परिभाषा फोकस और जनक रेखा के सापेक्ष दूरी पर आधारित है।
  • समन्वय ज्यामिति के माध्यम से अतिपरवलय का विश्लेषण किया जाता है।
  • गणितीय प्रोग्रामिंग में अतिपरवलय की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • 📌 अतिपरवलय: वह वक्र जिसमें दो फोकस से दूरी के अंतर का मान स्थिर होता है।
  • 📌 जनक रेखा: वह रेखा जिससे अतिपरवलय के बिंदु की दूरी फोकस से दूरी के अनुपात में होती है।

8.2 अतिपरवलय की परिभाषा

परिभाषा

8.2 अतिपरवलय की परिभाषा

अतिपरवलय की परिभाषा के अनुसार, वह वक्र है जिसमें किसी बिंदु P से दो निश्चित बिंदुओं F₁ और F₂ (फोकस) तक की दूरी का अंतर एक स्थिरांक होता है। अतिपरवलय के प्रत्येक बिंदु के लिए |PF₁ − PF₂| = 2a (जहाँ a स्थिरांक है)। इसके अलावा, अतिपरवलय के बिंदु से जनक रेखा तक की दूरी और फोकस तक की दूरी का अनुपात (e) हमेशा 1 से अधिक होता है।

  • अतिपरवलय के प्रत्येक बिंदु के लिए दूरी का अंतर स्थिर होता है।
  • फोकस और जनक रेखा की अवधारणा अतिपरवलय में महत्वपूर्ण है।
  • अतिपरवलय का विकेन्द्रता (e) हमेशा 1 से अधिक होता है।
  • अतिपरवलय का समीकरण द्विघातीय रूप में होता है।
  • 📌 फोकस: अतिपरवलय के दो निश्चित बिंदु।
  • 📌 विकेन्द्रता (e): अतिपरवलय के लिए e > 1।

8.3 अतिपरवलय का मानक समीकरण

सूत्र

8.3 अतिपरवलय का मानक समीकरण

अतिपरवलय का मानक समीकरण समन्वय ज्यामिति में x²/a² − y²/b² = 1 के रूप में लिखा जाता है। यहाँ a और b अतिपरवलय के अक्षों की लंबाई को दर्शाते हैं। यदि केंद्र (0,0) है, तो समीकरण x²/a² − y²/b² = 1 होता है। यदि केंद्र (h,k) है, तो समीकरण (x−h)²/a² − (y−k)²