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अफ्रीका, एशिया, एवं लैटिन अमेरिका में साम्राज्यवाद

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of Modern World (1453-1950 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

अफ्रीका, एशिया, एवं लैटिन अमेरिका में साम्राज्यवाद — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में साम्राज्यवाद के उदय की पृष्ठभूमि का विस्तार से वर्णन किया गया है। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यूरोपीय शक्तियों ने अपने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक हितों की पूर्ति के लिए इन क्षेत्रों में उपनिवेश स्थापित किए। इस प्रक्रिया को साम्राज्यवाद कहा गया। साम्राज्यवाद का अर्थ है किसी एक देश का दूसरे देश या क्षेत्र पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक नियंत्रण स्थापित करना। इस काल में औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोपीय देशों को कच्चे माल की आवश्यकता थी, साथ ही वे अपने उत्पादों के लिए नए बाजार भी खोज रहे थे। अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देश प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर थे, लेकिन तकनीकी दृष्टि से पिछड़े थे। यूरोपीय देशों ने इन क्षेत्रों में अपने सैन्य बल, तकनीकी प्रगति और कूटनीतिक चालों के माध्यम से अपना प्रभुत्व स्थापित किया। इस प्रक्रिया में स्थानीय समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा।

  • साम्राज्यवाद का अर्थ है एक देश का दूसरे देश पर नियंत्रण।
  • औद्योगिक क्रांति ने यूरोपीय देशों को उपनिवेशवाद के लिए प्रेरित किया।
  • अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध थे।
  • यूरोपीय देशों ने सैन्य, तकनीकी और कूटनीतिक साधनों से प्रभुत्व स्थापित किया।
  • स्थानीय समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा।
  • 📌 साम्राज्यवाद: किसी एक देश का दूसरे देश या क्षेत्र पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक नियंत्रण।
  • 📌 उपनिवेशवाद: किसी देश द्वारा दूसरे देश पर शासन स्थापित करना।

साम्राज्यवाद के कारण

अवधारणा

साम्राज्यवाद के कारण

इस अनुभाग में साम्राज्यवाद के प्रमुख कारणों का विश्लेषण किया गया है। औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोपीय देशों को कच्चे माल की आवश्यकता बढ़ गई थी। इसके अलावा, अपने उत्पादों के लिए नए बाजारों की तलाश, अधिशेष पूंजी का निवेश, जनसंख्या वृद्धि, और राष्ट्रीय गौरव की भावना ने भी साम्राज्यवाद को बढ़ावा दिया। वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति ने यूरोपीय देशों को सैन्य और नौसैनिक शक्ति प्रदान की, जिससे वे दूर-दराज के क्षेत्रों पर आसानी से कब्जा कर सके। धार्मिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता की भावना भी एक कारण थी, जिससे यूरोपीय देश अपने को सभ्य और अन्य देशों को असभ्य मानते थे।

  • औद्योगिक क्रांति के बाद कच्चे माल की आवश्यकता।
  • नए बाजारों की तलाश।
  • अधिशेष पूंजी का निवेश।
  • राष्ट्रीय गौरव और प्रतिस्पर्धा।
  • वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति।
  • धार्मिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता की भावना।
  • 📌 औद्योगिक क्रांति: 18वीं-19वीं शताब्दी में उत्पादन के साधनों में तकनीकी परिवर्तन।
  • 📌 अधिशेष पूंजी: वह पूंजी जो घरेलू निवेश के बाद बच जाती है।

अफ्रीका में साम्राज्यवाद

व्याख्या

अफ्रीका में साम्राज्यवाद

इस अनुभाग में अफ्रीका में यूरोपीय साम्राज्यवाद के विस्तार का विस्तार से वर्णन किया गया है। 19वीं शताब्दी के अंत तक लगभग पूरा अफ्रीका यूरोपीय शक्तियों के नियंत्रण में आ गया था। इसे 'अफ्रीका की दौड़' (Scramble for Africa) कहा जाता है। 1884-85 में बर्लि

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