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इमाइल दुर्कीम : जीवन चरित्र, प्रमुख रचनाएँ, धर्म एवं समाज

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Thinkers (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट

इमाइल दुर्कीम : जीवन चरित्र, प्रमुख रचनाएँ, धर्म एवं समाज — अध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस खंड में इमाइल दुर्कीम के जीवन, उनके समाजशास्त्रीय योगदान और उनके विचारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का परिचय दिया गया है। इमाइल दुर्कीम (1858-1917) फ्रांस के प्रसिद्ध समाजशास्त्री थे, जिन्हें आधुनिक समाजशास्त्र का संस्थापक माना जाता है। दुर्कीम ने समाज को एक 'सामाजिक तथ्य' के रूप में देखा और समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित किया। उनका मानना था कि समाज की संरचना और उसके कार्यों को वैज्ञानिक पद्धति से समझा जा सकता है। उन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं जैसे धर्म, शिक्षा, आत्महत्या आदि का गहन अध्ययन किया। दुर्कीम का कार्य समाज के एकीकृत और सामूहिक चेतना की अवधारणा पर केंद्रित था। उन्होंने समाज को व्यक्तियों के समूह से अधिक माना और कहा कि समाज के अपने नियम और संरचनाएँ होती हैं, जो व्यक्तियों पर प्रभाव डालती हैं।

  • इमाइल दुर्कीम का जन्म 1858 में फ्रांस के एपिनाल नगर में हुआ।
  • दुर्कीम को आधुनिक समाजशास्त्र का संस्थापक माना जाता है।
  • उन्होंने समाज को 'सामाजिक तथ्य' के रूप में परिभाषित किया।
  • दुर्कीम ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
  • उनका कार्य समाज की एकता और सामूहिक चेतना पर केंद्रित था।
  • उन्होंने धर्म, शिक्षा, आत्महत्या आदि विषयों पर गहन अध्ययन किया।
  • 📌 सामाजिक तथ्य: समाज के वे तत्व जो व्यक्तियों पर बाहरी और बाध्यकारी प्रभाव डालते हैं।
  • 📌 सामूहिक चेतना: समाज के सदस्यों द्वारा साझा की गई मान्यताओं और भावनाओं का समूह।

इमाइल दुर्कीम का जीवन चरित्र

व्याख्या

इमाइल दुर्कीम का जीवन चरित्र

इस खंड में इमाइल दुर्कीम के जीवन की प्रमुख घटनाओं, शिक्षा, करियर और उनके समाजशास्त्रीय विकास का विस्तार से वर्णन किया गया है। दुर्कीम का जन्म 15 अप्रैल 1858 को फ्रांस के एपिनाल नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। उन्होंने पेरिस विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में शिक्षा प्राप्त की और बाद में समाजशास्त्र की ओर आकर्षित हुए। 1887 में वे बोर्डो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नियुक्त हुए, जहाँ उन्होंने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित किया। 1902 में वे पेरिस विश्वविद्यालय चले गए। दुर्कीम ने 'लि अन्ने सोशियोलॉजिक' नामक समाजशास्त्रीय पत्रिका की स्थापना की, जिससे समाजशास्त्र के क्षेत्र में नए विचारों का विकास हुआ। उनका जीवन समाजशास्त्र को वैज्ञानिक आधार देने और समाज के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करने में समर्पित रहा।

  • दुर्कीम का जन्म 1858 में फ्रांस में हुआ।
  • उन्होंने दर्शनशास्त्र में शिक्षा प्राप्त की।
  • 1887 में बोर्डो विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर बने।
  • 1902 में पेरिस विश्वविद्यालय में कार्यरत हुए।
  • उन्होंने 'लि अन्ने सोशियोलॉजिक' पत्रिका की स्थापना की।
  • 1917 में उनका निधन हुआ।
  • 📌 लि अन्ने सोशियोलॉजिक: दुर्कीम द्वारा स्थापित समाजशास्त्रीय पत्रिका।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज के संगठन, संरचना और कार्यों का वैज्ञानिक अध्ययन।

दुर्कीम की प्रमुख रचनाएँ

व्याख्या

दुर्कीम की प्रमुख रचनाएँ

इस खंड में इमाइल दुर्कीम की प्रमुख रचनाओं का विस्तृत परिचय दिया गया है। उनकी रचनाएँ समाजशास्त्र के विभिन्न क्षेत्रों में मील का पत्थर मानी जाती हैं। प्रमुख रचनाएँ हैं: 'द डिवीजन ऑफ लेबर इन सोसाइटी' (1893), 'द रूल्स ऑफ सोसियोलॉजिकल मेथड' (1895), 'सुइस

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