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संख्याओं की कहानी

🎓 Class 8📖 Ganita Prakash (Hindi)📖 6 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~9 मिनट

संख्याओं की कहानी — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

3.1 रीमा की जिज्ञासा

व्याख्या

3.1 रीमा की जिज्ञासा

इस अनुभाग में रीमा की जिज्ञासा के माध्यम से संख्याओं के इतिहास और उनके प्रारंभिक रूपों की खोज की शुरुआत की गई है। रीमा एक पुरानी पुस्तक पढ़ते हुए एक पन्ना देखती है जिस पर अज्ञात प्रतीक बने होते हैं। उसके पिताजी उसे बताते हैं कि ये प्रतीक लगभग 4000 वर्ष पूर्व मेसोपोटामिया सभ्यता में उपयोग किए जाते थे, जो वर्तमान ईराक और आसपास के क्षेत्रों में थी। उस समय मनुष्य को गिनती, मापन, व्यापार, और समय के महत्वपूर्ण चक्रों को समझने के लिए संख्याओं की आवश्यकता हुई। प्रारंभ में वे आधुनिक संख्याओं का उपयोग नहीं करते थे, बल्कि चित्रों, निशानों और प्रतीकों के माध्यम से संख्या व्यक्त करते थे। भारत में भी हजारों वर्ष पूर्व संख्याओं के मौखिक और लिखित रूप विकसित हुए। यजुर्वेद संहिता में 10 की घातों के आधार पर संख्याओं के नामों का उल्लेख मिलता है, जैसे एक, दस, सौ, हजार आदि। भारतीय संख्या पद्धति में 0 का आविष्कार भी हुआ, जो गणित की प्रगति में क्रांतिकारी था। बख्शाली पांडुलिपि में शून्य का पहला ज्ञात उदाहरण मिलता है। आर्यभट्ट ने 499 सामान्य संवत् में इस पद्धति को वैज्ञानिक गणनाओं में उपयोग किया। भारतीय संख्या पद्धति अरब जगत और फिर यूरोप तक पहुँची। अरब गणितज्ञ अल-ख्वारिज्मी और अल-किंदी ने इसे लोकप्रिय बनाया। यूरोप में इसे 'अरबी संख्यांक' कहा गया, जबकि वास्तव में इसका मूल भारत था। इस पद्धति की सरलता और उपयोगिता ने इसे विश्वव्यापी बना दिया।

  • रीमा ने मेसोपोटामिया के प्राचीन संख्यात्मक प्रतीकों को देखा।
  • संख्या प्रणाली का विकास पाषाण युग से शुरू हुआ।
  • भारतीय संख्या पद्धति में 0 का आविष्कार हुआ।
  • बख्शाली पांडुलिपि में शून्य का पहला प्रमाण मिलता है।
  • भारतीय संख्या पद्धति अरब और फिर यूरोप में पहुँची।
  • 'अरबी संख्यांक' नामकरण में मूल भारत की भूमिका।
  • 📌 मेसोपोटामिया: प्राचीन सभ्यता जो वर्तमान ईराक क्षेत्र में थी।
  • 📌 बख्शाली पांडुलिपि: तीसरी शताब्दी की प्राचीन गणितीय पांडुलिपि जिसमें शून्य का उल्लेख है।
  • 📌 अल-ख्वारिज्मी: अरब गणितज्ञ जिन्होंने भारतीय संख्या पद्धति को लोकप्रिय बनाया।

गणन की क्रियाविधि

व्याख्या

गणन की क्रियाविधि

इस अनुभाग में प्राचीन काल में वस्तुओं की संख्या गिनने के लिए अपनाई गई विभिन्न विधियों का वर्णन किया गया है। कल्पना कीजिए कि लगभग दस हजार वर्ष पूर्व के पाषाण युग में हमारे पास गायों का झुंड है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि सभी गायें सुरक्षित वापस आई हैं, पड़ोसी से तुलना करनी है, और आवश्यकता अनुसार गायों की संख्या बढ़ानी है। विधि 1 में छड़ियों या कंकड़ों का उपयोग किया जाता है, जहाँ प्रत्येक गाय के लिए एक छड़ी रखी जाती है। इस प्रकार छड़ियों की संख्या से गायों की संख्या ज्ञात होती है। इसे एकैकी प्रतिचित्रण (one-to-one mapping) कहते हैं। विधि 2 में वस्तुओं के स्थान पर ध्वनियों या नामों का उपयोग होता है, जैसे वर्णमाला के अक्षर। प्रत्येक वस्तु को एक अक्षर से जोड़ा जाता है। यह विधि सीमित संख्या तक ही उपयोगी है क्योंकि वर्ण सीमित होते हैं। विधि 3 में लिखित प्रतीकों का उपयोग होता है, जैसे रोमन संख्या पद्धति में I, V, X आदि। यह पद्धति भी सीमित प्रतीकों के कारण बड़ी संख्याओं के लिए कठिन होती है। इन विधियों से पता चलता है कि संख्या पद्धति के लिए एक मानक अनुक्रम और प्रतीकों की आवश्यकता होती है। संख्याओं का कोई अंत नहीं होने के कारण एक अंतहीन मानक अनुक्रम बनाना चुनौतीपूर्ण है।

  • प्राचीन काल में वस्तुओं की संख्या गिनने के लिए छड़ियों, ध्वनियों, और लिखित प्रतीकों का उपयोग।
  • एकैकी प्रतिचित्रण विधि से वस्तु और प्रतीक का एक-एक मेल।
  • वर्णों की सीमित संख्या के कारण गिनती की सीमा।
  • रोमन संख्या पद्धति में प्रतीकों का संयोजन।
  • संख्या पद्धति के लिए मानक अनुक्रम आवश्यक।
  • अंतहीन संख्या के लिए अंतहीन अनुक्रम की आवश्यकता।
  • 📌 एकैकी प्रतिचित्रण: वस्तुओं और प्रतीकों के बीच एक-एक मेल।
  • 📌 मानक अनुक्रम: संख्या निरूपण के लिए प्रतीकों का निश्चित क्रम।
  • 📌 रोमन संख्या पद्धति: प्राचीन रोम की संख्या प्रणाली।

3.2 कुछ प्रारंभिक संख्या पद्धतियाँ

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3.2 कुछ प्रारंभिक संख्या पद्धतियाँ

इस अनुभाग में विभिन्न प्रारंभिक संख्या पद्धतियों का वर्णन है जो प्राचीन सभ्यताओं में विकसित हुईं। 1. शरीर के अंगों का प्रयोग: कई जन समुदायों ने गिनती के लिए हाथों और अन्य अंगों का उपयोग किया। पापुआ न्यू गिनी के जन समुदाय ने इसे मानक संख्या पद्धति के

अभ्यास प्रश्न — संख्याओं की कहानी

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.यदि एक आयताकार बक्से की ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई क्रमशः 20 cm, 15 cm और 10 cm है। तब इसका सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल है:
A.1100 cm 2
B.1200 cm 2
C.1300 cm 2
D.1400 cm 2

उत्तर:

1300 cm 2

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Q2.यदि एक बेलन की ऊँचाई मूल ऊँचाई की 1/4 हो जाती है और त्रिज्या दोगुनी हो जाती है, तो निम्नलिखित में से कौन सा सही होगा?
A.बेलन का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल दोगुना हो जाएगा
B.बेलन का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल अपरिवर्तित रहेगा
C.बेलन का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल आधा हो जाएगा
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

उपरोक्त में से कोई नहीं

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Q3.4 cm भुजा के एक घन को 1 cmभुजा के घनों में काट दिया जाता है। मूल घन और काटे गए घनों के सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात क्या है?
A.1:2
B.1:3
C.1:4
D.1:6

उत्तर:

1:4

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Q4.एक समचतुर्भुज का क्षेत्रफल जिसके विकर्णों की लंबाई 10 सेमी और 8.2 सेमी है:
A.41 cm 2
B.82 cm 2
C.410 cm 2
D.820 cm 2

उत्तर:

41 cm 2

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Q5.एक समलंब (ट्रेपीज़ियम) की परिधि 52 cm है और इसकी प्रत्येक गैर-समानांतर भुजा 10 cm तथा ऊंचाई 8 cm है। इसका क्षेत्रफल है:
A.124 cm 2
B.118 cm 2
C.128 cm 2
D.112 cm 2

उत्तर:

128 cm 2

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Q6.∛1000 के बराबर है ।
A.10
B.100
C.1
D.इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

10

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Q7.निम्नलिखित में से कौन सी संख्या एक पूर्ण घन नहीं है?
A.216
B.547
C.512
D.1331

उत्तर:

547

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Q8.64 का मुख्य गुणनखंड है:
A.2 x 2 x 2
B.4 x 4 x 4
C.8 x 8 x 8
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

4 x 4 x 4

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