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चालुक्य, पल्लव, एवं चोल का शासन एवं कला में योगदान

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (Earliest Time to 1200 AD) (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट

चालुक्य, पल्लव, एवं चोल का शासन एवं कला में योगदान — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

16.1 चालुक्य, पल्लव एवं चोल राजवंशों का उद्भव

व्याख्या

16.1 चालुक्य, पल्लव एवं चोल राजवंशों का उद्भव

इस खंड में चालुक्य, पल्लव और चोल राजवंशों के उद्भव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का वर्णन किया गया है। दक्षिण भारत में गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ, जिनमें चालुक्य, पल्लव और चोल प्रमुख थे। चालुक्य राजवंश का आरंभ छठी शताब्दी में हुआ, जिसकी राजधानी बादामी थी। पल्लव राजवंश की स्थापना तीसरी शताब्दी में कांचीपुरम में हुई, और चोल राजवंश का पुनरुत्थान नौवीं शताब्दी में तंजावुर क्षेत्र में हुआ। इन राजवंशों ने दक्षिण भारत की राजनीति, संस्कृति और कला में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • चालुक्य राजवंश की स्थापना छठी शताब्दी में बादामी में हुई।
  • पल्लव राजवंश की राजधानी कांचीपुरम थी।
  • चोल राजवंश का पुनरुत्थान नौवीं शताब्दी में हुआ।
  • इन राजवंशों ने दक्षिण भारत की राजनीति को प्रभावित किया।
  • गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ।
  • 📌 चालुक्य: दक्षिण भारत का एक प्रमुख राजवंश, जिसकी राजधानी बादामी थी।
  • 📌 पल्लव: कांचीपुरम के शासक, जिन्होंने दक्षिण भारत में कला का विकास किया।
  • 📌 चोल: तंजावुर क्षेत्र के शासक, जिनका शासन नौवीं शताब्दी से शुरू हुआ।

16.2 चालुक्य, पल्लव एवं चोल राजवंशों का राजनीतिक विस्तार

व्याख्या

16.2 चालुक्य, पल्लव एवं चोल राजवंशों का राजनीतिक विस्तार

इस खंड में तीनों राजवंशों के राजनीतिक विस्तार और उनके संघर्षों का वर्णन किया गया है। चालुक्य राजवंश ने अपने शासनकाल में दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों पर अधिकार किया। पुलकेशिन द्वितीय ने पल्लवों और उत्तर भारत के राजा हर्षवर्धन को भी पराजित किया। पल्लव राजवंश ने कांचीपुरम से दक्षिण के कई क्षेत्रों पर शासन किया और चालुक्यों से कई युद्ध किए। चोल राजवंश ने नौवीं शताब्दी में अपने साम्राज्य का विस्तार किया और तंजावुर, मदुरै, और कांचीपुरम पर अधिकार किया। राजराज चोल और राजेंद्र चोल ने चोल साम्राज्य को श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैलाया।

  • चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने पल्लवों और हर्षवर्धन को पराजित किया।
  • पल्लवों ने चालुक्यों के साथ कई युद्ध किए।
  • चोल राजवंश ने श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक विस्तार किया।
  • राजराज चोल और राजेंद्र चोल ने चोल साम्राज्य को मजबूत किया।
  • राजवंशों के बीच संघर्ष ने दक्षिण भारत की राजनीति को प्रभावित किया।
  • 📌 पुलकेशिन द्वितीय: चालुक्य राजवंश का प्रसिद्ध शासक।
  • 📌 राजराज चोल: चोल राजवंश का महान शासक, जिसने साम्राज्य का विस्तार किया।

16.3 प्रशासनिक व्यवस्था

व्याख्या

16.3 प्रशासनिक व्यवस्था

इस खंड में चालुक्य, पल्लव और चोल राजवंशों की प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन है। चालुक्य राजवंश में राजा सर्वोच्च था, उसके अधीन मंत्री, सेनापति, और अन्य अधिकारी थे। पल्लवों की प्रशासनिक व्यवस्था में राजा के साथ सभा और परिषद का महत्व था। चोल राजवं

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1भारतीय इतिहास के अध्ययन के स्रोत
10 नोट्स
2पूर्व पाषाण, नवपाषाण तथा ताम्रपाषाणकालीन भारतीय संस्कृतियाँ
11 नोट्स
3सिंधु घाटी सभ्यता
9 नोट्स
4वैदिक युग में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक जीवन
9 नोट्स
5भारत में लौह एवं महापाषाण युगीन संस्कृतियाँ
10 नोट्स
6महाजनपद काल – नंद वंश तक मगध का उत्कर्ष
11 नोट्स
7जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म
9 नोट्स
8मौर्य साम्राज्य – उद्भव, विस्तार एवं प्रशासनिक व्यवस्था
10 नोट्स
9मौर्य युगीन समाज, अर्थव्यवस्था, कला तथा अशोक का धर्म
9 नोट्स
10इंडो-ग्रीक, शुंग, शक, कुषाण एवं सातवाहन
10 नोट्स
11दक्षिण भारत : संगमकाल-साहित्य, समाज एवं राजनय
9 नोट्स
12गुप्त साम्राज्य – I – राजनीति एवं शासन
10 नोट्स
13गुप्त साम्राज्य – II – समाज, अर्थव्यवस्था, साहित्य, कला और
9 नोट्स
14हर्ष युग
10 नोट्स
15त्रिपक्षीय संघर्ष – पाल, प्रतिहार, एवं राष्ट्रकूट
8 नोट्स

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