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उत्तर-पूर्व भारत की राजनीति

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Indian Politics - An Introduction (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

उत्तर-पूर्व भारत की राजनीति — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

12.1 उत्तर-पूर्व भारत: परिचय

व्याख्या

12.1 उत्तर-पूर्व भारत: परिचय

उत्तर-पूर्व भारत भारतीय उपमहाद्वीप का एक विशिष्ट क्षेत्र है, जिसमें आठ राज्य शामिल हैं: असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, सांस्कृतिक विविधता और राजनीतिक संरचना इसे भारत के अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है। उत्तर-पूर्व भारत की सीमाएँ चीन, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश से मिलती हैं, जिससे इसकी रणनीतिक महत्ता बढ़ जाती है। यहाँ की जनसंख्या में विभिन्न जनजातियाँ, भाषाएँ और धार्मिक समूह शामिल हैं। इस क्षेत्र की राजनीति को समझने के लिए इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक संरचना और आर्थिक विकास को ध्यान में रखना आवश्यक है। उत्तर-पूर्व भारत में राजनीतिक अस्थिरता, आंदोलन, और केंद्र-राज्य संबंधों में जटिलता देखने को मिलती है।

  • उत्तर-पूर्व भारत में आठ राज्य शामिल हैं।
  • यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
  • यहाँ की जनसंख्या में विविधता है।
  • राजनीतिक अस्थिरता और आंदोलन आम हैं।
  • केंद्र-राज्य संबंधों में जटिलता है।
  • भौगोलिक स्थिति इसे अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है।
  • 📌 उत्तर-पूर्व भारत: भारत का पूर्वी भाग जिसमें आठ राज्य शामिल हैं।
  • 📌 जनजाति: सामाजिक समूह जो विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान रखते हैं।

12.2 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अवधारणा

12.2 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उत्तर-पूर्व भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस क्षेत्र को 'एक्सक्लूडेड' और 'पार्शियली एक्सक्लूडेड' क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिससे यहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था अलग रही। स्वतंत्रता के बाद, इन क्षेत्रों को भारतीय संघ में शामिल किया गया, लेकिन कई जनजातियों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और स्वायत्तता की मांग की। 1950 के दशक में कई राज्यों का गठन हुआ, जैसे नागालैंड (1963), मिज़ोरम (1987), अरुणाचल प्रदेश (1987), आदि। इन राज्यों के गठन के पीछे राजनीतिक आंदोलन, जनजातीय असंतोष और केंद्र सरकार की नीति रही है।

  • ब्रिटिश शासन में क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था अलग थी।
  • स्वतंत्रता के बाद क्षेत्र को भारतीय संघ में शामिल किया गया।
  • राज्य गठन के पीछे राजनीतिक आंदोलन थे।
  • जनजातियों ने सांस्कृतिक पहचान और स्वायत्तता की मांग की।
  • 1950-1980 के दशक में कई नए राज्य बने।
  • केंद्र सरकार की नीति ने राज्य गठन में भूमिका निभाई।
  • 📌 एक्सक्लूडेड क्षेत्र: ब्रिटिश शासन में प्रशासनिक रूप से अलग क्षेत्र।
  • 📌 स्वायत्तता: स्वतंत्र प्रशासनिक अधिकार।

12.3 सामाजिक संरचना और विविधता

व्याख्या

12.3 सामाजिक संरचना और विविधता

उत्तर-पूर्व भारत सामाजिक दृष्टि से अत्यंत विविधतापूर्ण है। यहाँ अनेक जनजातियाँ, भाषाएँ और धार्मिक समूह निवास करते हैं। असम में बोडो, मिज़ोरम में मिज़ो, नागालैंड में नागा, मणिपुर में मीतेई और कुकी, त्रिपुरा में त्रिपुरी, अरुणाचल प्रदेश में अनेक जनजाति