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मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल

🎓 Class 11📖 Aroh📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट

मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय में 'मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल' नामक कविता प्रस्तुत की गई है, जो भक्तिकाल की प्रसिद्ध कवयित्री मीरा बाई द्वारा रचित है। मीरा बाई राजस्थान के मेड़ता की राजकुमारी थीं, जिनका जन्म 1498 में हुआ था। उनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ था। विवाह के बाद भी मीरा बाई ने अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरा प्रेम और भक्ति व्यक्त की। वे कृष्ण भक्ति में लीन होकर सांसारिक जीवन की सभी बंधनों से ऊपर उठ गईं। उनकी भक्ति और समर्पण की भावना इतनी प्रबल थी कि वे अपने पति, परिवार और समाज की परवाह किए बिना केवल गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) को ही अपना सर्वस्व मानती थीं। इस कविता में मीरा बाई ने अपने प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की भावना को शब्दों में पिरोया है। यह कविता सरल भाषा में है, जिसमें मीरा की गहरी श्रद्धा और भक्ति की अनुभूति स्पष्ट रूप से झलकती है। इस कविता के माध्यम से विद्यार्थियों को भक्ति की शक्ति, आत्मसमर्पण और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश मिलता है।

  • मीरा बाई राजस्थान के मेड़ता की राजकुमारी थीं।
  • उनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ था।
  • मीरा बाई की भक्ति मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के प्रति थी।
  • उनकी कविता में भक्ति, प्रेम और आत्मसमर्पण की भावना प्रबल रूप से व्यक्त हुई है।
  • कविता की भाषा सरल, सहज और भावपूर्ण है।
  • 📌 भक्ति: ईश्वर के प्रति पूर्ण प्रेम और समर्पण की भावना।
  • 📌 गिरधर गोपाल: भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम, जिनका मीरा बाई ने आराधना की।
  • 📌 भक्तिकाल: ऐसा साहित्यिक काल जिसमें भक्ति और ईश्वर प्रेम की प्रधानता होती है।

कविता पाठ

व्याख्या

कविता पाठ

इस खंड में मीरा बाई की प्रसिद्ध कविता 'मेरे तो गिरधर गोपाल' का मूल पाठ दिया गया है। कविता के प्रत्येक पद में मीरा बाई ने अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण व्यक्त किया है। वे कहती हैं कि उनके लिए संसार के अन्य संबंध जैसे पति, परिवार, धन-वैभव आदि का कोई महत्व नहीं है। उनका एकमात्र सहारा और प्रेम गिरधर गोपाल हैं। कविता की भाषा सरल और भावपूर्ण है, जो सीधे हृदय को छू जाती है। प्रत्येक पद में मीरा की भक्ति की गहराई और उनकी आत्मा की पुकार सुनाई देती है। कविता में मीरा ने अपने जीवन के संघर्षों और समाज की बाधाओं के बावजूद अपने ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम को व्यक्त किया है। यह कविता भक्ति साहित्य की एक अमूल्य धरोहर है जो आज भी लोगों के हृदय में गूंजती है।

  • कविता में मीरा बाई ने अपने ईश्वर प्रेम को सर्वोपरि रखा है।
  • संसार के सांसारिक संबंधों को उन्होंने तुच्छ माना है।
  • कविता की भाषा सरल, सहज और भावपूर्ण है।
  • मीरा की भक्ति की गहराई कविता के हर पद में स्पष्ट है।
  • 📌 पद: कविता की छोटी-छोटी पंक्तियाँ।
  • 📌 आराध्य: पूजा या भक्ति का विषय।
  • 📌 सहारा: समर्थन या आधार।

कविता की भाव-व्याख्या

व्याख्या

कविता की भाव-व्याख्या

इस खंड में 'मेरे तो गिरधर गोपाल' कविता के भावों की विस्तार से व्याख्या की गई है। मीरा बाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण दर्शाती हैं। वे कहती हैं कि उनके लिए संसार के अन्य संबंध, पति, परिवार, धन-वैभव आदि का कोई महत्व नहीं है। उनका एकमात्

अभ्यास प्रश्न — मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.‘टॉर्च बेचने वाले” निबन्ध निम्नलिखित में से किस शैली में लिखा गया है?
A.विवरणात्मक
B.संश्लिष्ट
C.रहस्यात्मक
D.व्यंग्यात्मक

उत्तर:

व्यंग्यात्मक

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Q2.‘टॉर्च बेचने वाले’ निबन्ध में टॉर्च बेचने वाली कम्पनी का दूसरा नाम था-
A.सूरज छाप
B.दुधिया प्रकाश
C.किरण
D.उगता सूरज

उत्तर:

सूरज छाप

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Q3.पैसा कमाने के लिए दोनों मित्र जब अलग- अलग दिशा में गये तो दोनों ने जाने से पहले क्या वायदा किया था?
A.खूब पैसा कमाएंगे
B.पाँच वर्ष बाद इसी तारीख को पुनः दोनों मिलेंगे
C.एक-दूसरे से अधिक पैसा कमा कर दिखायेंगे
D.अपने अपने अनुभव लिख कर रखेंगे

उत्तर:

एक-दूसरे से अधिक पैसा कमा कर दिखायेंगे

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Q4.इतने वर्षो बाद दोनों मित्र मिले थे, फिर भी साधु बने मित्र ने कार में अपने पुराने मित्र से बात क्यों नहीं की?
A.क्योंकि वह अपने पैसे कमाने का राज मित्र को नहीं बताना चाहता था ।
B.क्योंकि उसे लगता था कि मित्र की अब हैसियत उससे कम है ।
C.क्योंकि वह कार में ड्राईवर के सामने बात नहीं करना चाहता था ।
D.क्योंकि वह आपने दोस्त को टालना चाहता था ।

उत्तर:

क्योंकि वह कार में ड्राईवर के सामने बात नहीं करना चाहता था ।

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Q5.“वह काम बंद कर दिया अब तो आत्मा के भीतर टॉर्च जल उठा है। ये सूरज छाप अब व्यर्थ मालूम होते हैं। ‘टॉर्च बेचने वाले’ पाठ के आधार पर इस कथन से क्या परिलक्षित होता है?
A.व्यंग्यार्थ
B.अभिधार्थ
C.अभिधार्थ
D.लक्षाणार्थ

उत्तर:

व्यंग्यार्थ

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Q6.टॉर्च बेचने वाला किस तरह डरा कर लोगों को टॉर्च बेचता है?
A.आजकल सब जगह अंधेरा छाया रहता है।
B.उसके आसपास भयानक अंधेरा है, शेर और चीते चारों तरफ घूम रहे हैं।
C.अंधेरा घर में भी है, आदमी रात में पेशाब करने उठता है और सांप पर उसका पांव पड़ जाता है।
D.सभी तरह से

उत्तर:

सभी तरह से

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Q7.'मैं तो घूम-घूमकर टॉर्च बेचता रहा। सच बता क्या तू भी टॉर्च का व्यापारी है?' इस बात को सुन कर दूसरे मित्र की क्या प्रतिक्रिया होती है?
A.सहमति देता है।
B.शरमा जाता है।
C.अपने को साधु, दार्शनिक और संत कहता है ।
D.घबरा जाता है।

उत्तर:

अपने को साधु, दार्शनिक और संत कहता है ।

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Q8.बाहर जो अँधेरा है उसके न हटने से क्या नहीं हो पा रहा है?
A.काम नहीं हो पा रहा है
B.कुछ दिखाई नहीं दे रहा है
C.सुबह नहीं हो पा रही है
D.उपरोक्त सभी

उत्तर:

सुबह नहीं हो पा रही है

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मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल — अध्ययन गाइड व लेख