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सीमांत लागत लेखांकन

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Cost Accounting (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

सीमांत लागत लेखांकन — अध्ययन नोट्स

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16.1 सीमांत लागत लेखांकन का परिचय

व्याख्या

16.1 सीमांत लागत लेखांकन का परिचय

सीमांत लागत लेखांकन (Marginal Costing) एक महत्वपूर्ण लागत लेखांकन तकनीक है, जिसमें उत्पादन की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के निर्माण में होने वाली अतिरिक्त लागत का विश्लेषण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रबंधन को त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने में सहायता करना है। सीमांत लागत वह लागत है, जो उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई बनाने पर आती है। सीमांत लागत लेखांकन में केवल चर लागत (Variable Cost) को उत्पाद लागत में शामिल किया जाता है, जबकि स्थिर लागत (Fixed Cost) को अवधि लागत (Period Cost) माना जाता है और उसे लाभ-हानि खाते में सीधे दिखाया जाता है। यह तकनीक लाभकारी उत्पाद मिश्रण, मूल्य निर्धारण, उत्पादन स्तर, विशेष आदेशों की स्वीकृति आदि जैसे निर्णयों के लिए अत्यंत उपयोगी है। सीमांत लागत लेखांकन में योगदान (Contribution) की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो बिक्री और चर लागत के अंतर के रूप में ज्ञात होती है।

  • सीमांत लागत लेखांकन में केवल चर लागत को उत्पाद लागत में शामिल किया जाता है।
  • स्थिर लागत को अवधि लागत माना जाता है।
  • यह तकनीक प्रबंधन निर्णयों के लिए उपयोगी है।
  • सीमांत लागत = कुल चर लागत में परिवर्तन ÷ उत्पादन मात्रा में परिवर्तन।
  • योगदान (Contribution) = बिक्री − कुल चर लागत।
  • सीमांत लागत लेखांकन लाभ-हानि विश्लेषण में सहायक है।
  • 📌 सीमांत लागत: उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई पर आने वाली लागत।
  • 📌 चर लागत: उत्पादन के साथ बदलने वाली लागत।
  • 📌 स्थिर लागत: उत्पादन के स्तर से अप्रभावित लागत।

16.2 सीमांत लागत की विशेषताएँ

अवधारणा

16.2 सीमांत लागत की विशेषताएँ

सीमांत लागत लेखांकन की कई विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो इसे अन्य लागत लेखांकन प्रणालियों से अलग बनाती हैं। इसमें केवल चर लागत को उत्पाद लागत में शामिल किया जाता है, जबकि स्थिर लागत को अवधि लागत माना जाता है। सीमांत लागत लेखांकन में लाभ-हानि का निर्धारण योगदान (Contribution) के आधार पर किया जाता है। यह तकनीक लागत-आय-लाभ (Cost-Volume-Profit) विश्लेषण में अत्यंत सहायक है। सीमांत लागत लेखांकन में उत्पादन, बिक्री, लाभ, और लागत के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से समझाया जाता है।

  • केवल चर लागत को उत्पाद लागत में शामिल किया जाता है।
  • स्थिर लागत को अवधि लागत के रूप में माना जाता है।
  • लाभ-हानि का निर्धारण योगदान के आधार पर किया जाता है।
  • सीमांत लागत लेखांकन लागत-आय-लाभ विश्लेषण में सहायक है।
  • निर्णय लेने में त्वरितता और सटीकता आती है।
  • उत्पादन, बिक्री और लाभ के बीच संबंध स्पष्ट होता है।
  • 📌 योगदान: बिक्री और चर लागत के बीच का अंतर।
  • 📌 लाभ: योगदान में से स्थिर लागत घटाने के बाद शेष राशि।

16.3 सीमांत लागत और अवशिष्ट लागत में अंतर

परिभाषा

16.3 सीमांत लागत और अवशिष्ट लागत में अंतर

सीमांत लागत और अवशिष्ट लागत (Absorption Costing) दोनों ही लागत लेखांकन की प्रमुख प्रणालियाँ हैं, परंतु इनमें कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। सीमांत लागत लेखांकन में केवल चर लागत को उत्पाद लागत में शामिल किया जाता है, जबकि स्थिर लागत को अवधि लागत माना जाता है

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