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शारीरिक भाषा एवं भाषा टिप्पणी

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Communication (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट

शारीरिक भाषा एवं भाषा टिप्पणी — अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

15.1 शारीरिक भाषा का परिचय

परिभाषा

15.1 शारीरिक भाषा का परिचय

शारीरिक भाषा (Body Language) वह संचार माध्यम है जिसमें व्यक्ति अपने शरीर के अंगों, हाव-भाव, चेहरे की भाव-भंगिमा, आँखों की गतिविधि, हाथों की स्थिति, चलने-फिरने के तरीके आदि के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और मनोभावों को व्यक्त करता है। यह मौन संचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शारीरिक भाषा का प्रयोग व्यावसायिक संचार में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शब्दों के बिना भी संदेश को प्रभावी ढंग से पहुँचाने में सक्षम है। शारीरिक भाषा का अध्ययन करने से हम यह समझ सकते हैं कि व्यक्ति की वास्तविक भावना क्या है, चाहे वह कुछ भी कह रहा हो।

  • शारीरिक भाषा मौन संचार का प्रमुख रूप है।
  • व्यक्ति के हाव-भाव, चेहरे की भाव-भंगिमा, आँखों की गतिविधि आदि से संदेश व्यक्त होते हैं।
  • व्यावसायिक संचार में शारीरिक भाषा का विशेष महत्व है।
  • शारीरिक भाषा से व्यक्ति की वास्तविक भावना का पता चलता है।
  • शब्दों के बिना भी प्रभावी संचार संभव है।
  • 📌 शारीरिक भाषा: शरीर के हाव-भाव, चेहरे की भाव-भंगिमा आदि द्वारा संचार।
  • 📌 मौन संचार: बिना बोले हुए संदेश का आदान-प्रदान।

15.2 शारीरिक भाषा के प्रकार

अवधारणा

15.2 शारीरिक भाषा के प्रकार

शारीरिक भाषा के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से चेहरे की भाव-भंगिमा, आँखों की गतिविधि, हाथों की स्थिति, शरीर की मुद्रा, चलने-फिरने का तरीका, स्पर्श, और अंतरंगता की दूरी शामिल है। प्रत्येक प्रकार का अपना महत्व होता है और यह व्यक्ति की मनोदशा, आत्मविश्वास, और संचार शैली को दर्शाता है। चेहरे की भाव-भंगिमा सबसे अधिक संदेश देती है, जैसे मुस्कान, भौंहें चढ़ाना, आँखों का संकुचन आदि। आँखों की गतिविधि जैसे आँखों का संपर्क, पलक झपकाना, दृष्टि की दिशा आदि भी संदेश देती है। हाथों की स्थिति जैसे हाथ मिलाना, हाथ जोड़ना, इशारा करना आदि संचार को प्रभावित करते हैं। शरीर की मुद्रा जैसे सीधे बैठना, झुककर बैठना, खड़े होने का तरीका आदि से व्यक्ति की मानसिक स्थिति का पता चलता है।

  • शारीरिक भाषा के मुख्य प्रकार: चेहरे की भाव-भंगिमा, आँखों की गतिविधि, हाथों की स्थिति, शरीर की मुद्रा।
  • चेहरे की भाव-भंगिमा सबसे अधिक संदेश देती है।
  • आँखों का संपर्क आत्मविश्वास दर्शाता है।
  • हाथों की स्थिति संचार को प्रभावी बनाती है।
  • शरीर की मुद्रा से व्यक्ति की मानसिक स्थिति का पता चलता है।
  • स्पर्श और अंतरंगता की दूरी भी शारीरिक भाषा के अंग हैं।
  • 📌 चेहरे की भाव-भंगिमा: चेहरे पर भावों का प्रदर्शन।
  • 📌 आँखों की गतिविधि: आँखों का संपर्क, पलक झपकाना आदि।
  • 📌 हाथों की स्थिति: हाथ मिलाना, इशारा करना आदि।

15.3 शारीरिक भाषा का महत्व

व्याख्या

15.3 शारीरिक भाषा का महत्व

शारीरिक भाषा का महत्व व्यावसायिक संचार में अत्यधिक है। यह संचार को प्रभावी, स्पष्ट और विश्वसनीय बनाती है। शारीरिक भाषा से व्यक्ति की वास्तविक भावना, मनोदशा और विचारों का पता चलता है। जब शब्दों और शारीरिक भाषा में विरोध होता है, तो शारीरिक भाषा अधिक व

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Business Communication · Vardhman Mahaveer Open University

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