वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण: कक्षा 12 के लिए सम्पूर्ण परिचय
द्वारा MyStudyCoach Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच के संबंध को दर्शाता है। कक्षा 12 के छात्रों के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विद्युतचुंबकीय सिद्धांतों की नींव रखता है। इस लेख में आप इसके प्रयोग, सिद्धांत और उपयोग को विस्तार से जानेंगे।
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण क्या है?
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी चालक कुंडली में चुंबकीय क्षेत्र के परिवर्तन से विद्युत धारा उत्पन्न होती है। यह सिद्धांत पहली बार माइकल फैराडे ने 1831 में खोजा था। जब भी चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तब कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है। यह प्रक्रिया विद्युतचुंबकीय सिद्धांत का आधार है और कई विद्युत उपकरणों जैसे जनरेटर, ट्रांसफार्मर आदि में उपयोग होती है।
- प्रेरण तब होती है जब चुंबकीय क्षेत्र या कुंडली की स्थिति बदलती है।
- स्थिर चुंबकीय क्षेत्र में कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होती।
- प्रेरित ईएमएफ का परिमाण चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है।
फैराडे और हेनरी के प्रयोगों से प्रेरण की खोज
माइकल फैराडे और जोसेफ हेनरी ने वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत को प्रयोगों के माध्यम से स्थापित किया।
प्रयोग 1:
- एक कुंडली C₁ के पास चुंबक के उत्तरी ध्रुव को लाने-ले जाने पर धारामापी में विक्षेप होता है।
- चुंबक की गति से प्रेरित धारा उत्पन्न होती है, लेकिन चुंबक स्थिर होने पर विक्षेप समाप्त हो जाता है।
प्रयोग 2:
- धारायुक्त कुंडली C₂ को C₁ के पास लाने-ले जाने पर C₁ में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
- यह चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन के कारण होता है।
प्रयोग 3:
- दो स्थिर कुंडलियों में से एक में धारा चालू-बंद करने पर दूसरी में क्षणिक प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
इन प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ कि कुंडली और चुंबक के बीच सापेक्ष गति और चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन प्रेरित धारा का कारण है।
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण पर अपने आप को परखें? हमारा मुफ़्त क्विज़ हल करें →
चुंबकीय फ्लक्स और प्रेरण का संबंध
चुंबकीय फ्लक्स ($\Phi$) एक क्षेत्र है जो किसी सतह से गुजरने वाले चुंबकीय क्षेत्र की मात्रा को दर्शाता है। इसे निम्नलिखित सूत्र से परिभाषित किया जाता है:
$$\Phi = B \times A \times \cos\theta$$
जहाँ,
- $B$ = चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (Tesla)
- $A$ = सतह का क्षेत्रफल (m²)
- $\theta$ = चुंबकीय क्षेत्र और सतह के सामान्य के बीच कोण
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम कहता है कि प्रेरित ईएमएफ चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
$$E = - \frac{d\Phi}{dt}$$
यहाँ $E$ प्रेरित ईएमएफ है।
- फ्लक्स में परिवर्तन से ही प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
- फ्लक्स परिवर्तन तेज होगा तो प्रेरित ईएमएफ अधिक होगा।
स्व-प्रेरण और परस्पर प्रेरण
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के दो मुख्य प्रकार हैं:
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्व-प्रेरण | एक ही कुंडली में धारा परिवर्तन से प्रेरित ईएमएफ उत्पन्न होता है। | इंडक्टर्स, मोटर स्टार्टर |
| परस्पर प्रेरण | एक कुंडली में धारा परिवर्तन से दूसरी कुंडली में प्रेरित ईएमएफ उत्पन्न होता है। | ट्रांसफार्मर, जनरेटर |
स्व-प्रेरण: जब किसी कुंडली में धारा बदलती है, तब उसी कुंडली में चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और एक प्रेरित ईएमएफ उत्पन्न होता है, जिसे स्व-प्रेरण कहते हैं।
परस्पर प्रेरण: जब एक कुंडली में धारा बदलती है, तो उसके चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन होता है, जो दूसरी कुंडली में प्रेरित ईएमएफ उत्पन्न करता है।
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के प्रयोग और उपयोग
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत का उपयोग कई विद्युत उपकरणों में होता है। कुछ प्रमुख उपयोग हैं:
- डीसी डायनेमो: विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करता है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली की गति से विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
- ट्रांसफार्मर: परस्पर प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है, जो वोल्टेज को बढ़ाने या घटाने में मदद करता है।
- इंडक्टर्स: स्व-प्रेरण का उपयोग कर करंट को नियंत्रित करते हैं।
- इलेक्ट्रिक मोटर: विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है, जिसमें प्रेरण की भूमिका होती है।
इन उपकरणों में प्रेरण की समझ से आप NCERT कक्षा 12 के फिजिक्स के प्रश्नों को बेहतर समझ सकते हैं।
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सूत्र और उदाहरण
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण का मुख्य सूत्र है:
$$E = -N \frac{d\Phi}{dt}$$
जहाँ,
- $E$ = प्रेरित ईएमएफ (Volt)
- $N$ = कुंडली की संख्या
- $\frac{d\Phi}{dt}$ = चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन की दर
उदाहरण: एक कुंडली में 50 लूप हैं और चुंबकीय फ्लक्स 0.2 वेबर से 0.05 वेबर तक 0.01 सेकंड में घटता है। प्रेरित ईएमएफ ज्ञात करें।
हल: $$\Delta \Phi = 0.05 - 0.2 = -0.15\, Wb$$ $$\frac{d\Phi}{dt} = \frac{-0.15}{0.01} = -15\, Wb/s$$ $$E = -50 \times (-15) = 750\, V$$
इस प्रकार प्रेरित ईएमएफ 750 वोल्ट है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण कब उत्पन्न होती है?
जब किसी कुंडली में चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तब वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण उत्पन्न होती है।
फैराडे के प्रयोग में चुंबक की गति का क्या प्रभाव होता है?
चुंबक की गति से प्रेरित धारा की मात्रा बढ़ती है और स्थिर होने पर प्रेरित धारा बंद हो जाती है।
स्व-प्रेरण और परस्पर प्रेरण में क्या अंतर है?
स्व-प्रेरण में एक ही कुंडली में प्रेरित ईएमएफ उत्पन्न होता है, परस्पर प्रेरण में एक कुंडली से दूसरी कुंडली में।
डीसी डायनेमो किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
डीसी डायनेमो विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करता है।
चुंबकीय फ्लक्स की गणना कैसे करते हैं?
चुंबकीय फ्लक्स $\Phi = B \times A \times \cos\theta$ से किया जाता है।
इस अध्याय में महारत हासिल करें
पूरा वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।
MyStudyCoach के साथ स्मार्ट पढ़ें
रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।
मुफ़्त सीखना शुरू करेंऔर पढ़ें
- Semiconductor Electronics: Materials, Devices And Simple Circuits 14.1 Introduction | Class 12 Physics Notes
Clear NCERT-aligned notes on Semiconductor Electronics: Materials, Devices And Simple Circuits 14.1 Introduction for Class 12 Physics.
- Semiconductor Electronics: Materials, Devices And Simple Circuits 14.1 Introduction | Class 12 Physics Notes
Clear NCERT-aligned notes on Semiconductor Electronics: Materials, Devices And Simple Circuits 14.1 Introduction for Class 12 Physics.
- Semiconductor Electronics: Materials, Devices And Simple Circuits 14.1 Introduction | Class 12 Physics Notes
Clear NCERT-aligned notes on Semiconductor Electronics: Materials, Devices And Simple Circuits 14.1 Introduction for Class 12 Physics.