तरंग प्रकाशिकी: कक्षा 12 के लिए पूर्ण परिचय और सिद्धांत
द्वारा MyStudyCoach Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

तरंग प्रकाशिकी कक्षा 12 भौतिकी का एक अहम अध्याय है जो प्रकाश की तरंग प्रकृति, परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समझाता है। इस लेख में हम इन सिद्धांतों को सरल और परीक्षा-केन्द्रित भाषा में विस्तार से जानेंगे।
तरंग प्रकाशिकी का परिचय और ऐतिहासिक विकास
तरंग प्रकाशिकी वह शाखा है जो प्रकाश की तरंग स्वरूपता का अध्ययन करती है। सन् 1637 में दकार्ते ने प्रकाश के कणिका मॉडल का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में न्यूटन ने विकसित किया। इस कणिका सिद्धांत से परावर्तन और अपवर्तन के नियम समझाए गए।
परन्तु 1678 में क्रिस्टिआन हाइगेंस ने प्रकाश के तरंग सिद्धांत को प्रस्तुत किया, जिसमें प्रकाश को यांत्रिक तरंग माना गया। यह सिद्धांत प्रकाश की चाल में होने वाले व्यवहार को बेहतर समझाता है। 1850 में फूको के प्रयोग ने जल में प्रकाश की चाल कम होने की पुष्टि की, जिससे तरंग सिद्धांत को बल मिला।
1801 में टॉमस यंग के व्यतिकरण प्रयोग ने प्रकाश की तरंग प्रकृति को प्रमाणित किया। मैक्सवेल ने विद्युतचुंबकीय सिद्धांत प्रस्तुत कर प्रकाश को विद्युतचुंबकीय तरंग बताया, जो निर्वात में भी संचरित होती है।
परावर्तन और अपवर्तन के नियम
परावर्तन और अपवर्तन तरंग प्रकाशिकी के मूलभूत सिद्धांत हैं।
- परावर्तन: जब प्रकाश किसी माध्यम की सतह से टकराता है और वापस उसी माध्यम में लौटता है।
- अपवर्तन: जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है और उसकी दिशा बदल जाती है।
परावर्तन के नियम: 1. परावर्तित किरण, अपवर्तित किरण और सामान्य रेखा एक ही तल में होते हैं। 2. परावर्तन कोण ($ heta_r$) और आपतन कोण ($ heta_i$) बराबर होते हैं।
अपवर्तन के नियम: 1. अपवर्तन किरण, आपतन किरण और सामान्य एक तल में होते हैं। 2. आपतन कोण और अपवर्तन कोण के बीच संबंध है: $$n_1 imes ext{sin} heta_1 = n_2 imes ext{sin} heta_2$$
जहाँ $n_1$ और $n_2$ दोनों माध्यमों के अपवर्तक सूचकांक हैं।
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व्यतिकरण और विवर्तन की घटनाएँ
तरंग प्रकाशिकी में व्यतिकरण और विवर्तन महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं जो प्रकाश की तरंग प्रकृति को दर्शाती हैं।
- व्यतिकरण (Diffraction): जब प्रकाश किसी बाधा या छिद्र के किनारे से गुजरता है तो वह मुड़ जाता है। यह घटना प्रकाश की तरंग प्रकृति का प्रमाण है।
- विवर्तन (Interference): जब दो या दो से अधिक प्रकाश तरंगें एक साथ मिलती हैं तो वे एक-दूसरे को बढ़ा या घटा सकती हैं। इससे प्रकाश और अंधकार के क्षेत्र बनते हैं।
टॉमस यंग का व्यतिकरण प्रयोग: 1801 में यंग ने दो संकीर्ण छिद्रों से गुजरने वाली प्रकाश तरंगों के व्यतिकरण और विवर्तन का प्रयोग किया। इस प्रयोग ने साबित किया कि प्रकाश तरंग है क्योंकि केवल तरंगें ही इस प्रकार के विवर्तन पैटर्न बना सकती हैं।
ध्रुवण और प्रकाश की तरंग प्रकृति
ध्रुवण (Polarization) वह प्रक्रिया है जिससे प्रकाश की तरंगों की कंपन दिशा नियंत्रित की जाती है।
प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है, जिसका अर्थ है कि इसकी कंपन दिशा तरंग के संचरण दिशा के लंबवत होती है।
ध्रुवण के प्रकार:
- रैखिक ध्रुवण
- वृत्तीय ध्रुवण
- अण्डाकार ध्रुवण
ध्रुवण से यह सिद्ध होता है कि प्रकाश तरंग प्रकृति का है क्योंकि केवल अनुप्रस्थ तरंगें ही ध्रुवित हो सकती हैं।
उदाहरण: धूप के चश्मे में ध्रुवित फिल्टर होते हैं जो परावर्तित और अपवर्तित प्रकाश की तीव्रता कम करते हैं।
तरंग प्रकाशिकी में महत्वपूर्ण सूत्र और उदाहरण
तरंग प्रकाशिकी में कुछ महत्वपूर्ण सूत्र और उनके प्रयोग परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।
1. अपवर्तनांक और तरंग दैर्ध्य का संबंध: जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, तो उसकी तरंग दैर्ध्य बदल जाती है।
$$ ext{नया तरंग दैर्ध्य} = rac{ ext{पुराना तरंग दैर्ध्य}}{n}$$ जहाँ $n$ अपवर्तक सूचकांक है।
उदाहरण: वैक्यूम में तरंग दैर्ध्य $6000 ext{ Å}$ है और कांच का अपवर्तक सूचकांक $1.5$ है, तो कांच में तरंग दैर्ध्य होगा:
$$rac{6000}{1.5} = 4000 ext{ Å}$$
2. व्यतिकरण कोण: जब प्रकाश किसी सतह से पूरी तरह ध्रुवीकृत होता है, तब घटना का कोण $ heta$ होता है:
$$ heta = an^{-1}(n)$$ जहाँ $n$ अपवर्तक सूचकांक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तरंग प्रकाशिकी में प्रकाश की प्रकृति क्या है?
तरंग प्रकाशिकी में प्रकाश को विद्युतचुंबकीय तरंग माना जाता है, जो अनुप्रस्थ तरंग होती है।
टॉमस यंग का व्यतिकरण प्रयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
यह प्रयोग प्रकाश की तरंग प्रकृति को प्रमाणित करता है क्योंकि व्यतिकरण केवल तरंगों में होता है।
ध्रुवण से क्या सिद्ध होता है?
ध्रुवण से यह सिद्ध होता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है क्योंकि केवल अनुप्रस्थ तरंगें ही ध्रुवित हो सकती हैं।
परावर्तन और अपवर्तन के नियम क्या हैं?
परावर्तन में परावर्तित कोण आपतन कोण के बराबर होता है, और अपवर्तन में $n_1 imes ext{sin} heta_1 = n_2 imes ext{sin} heta_2$ लागू होता है।
फूको के प्रयोग का क्या महत्व है?
फूको के प्रयोग ने जल में प्रकाश की चाल वायु की तुलना में कम होने की पुष्टि की, जिससे तरंग सिद्धांत को समर्थन मिला।
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