भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास: कक्षा 12 भूगोल
द्वारा MyStudyCoach Team · प्रकाशित 1 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास कक्षा 12 के भूगोल विषय का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें देश के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लिए योजनाओं और सतत विकास के सिद्धांतों पर चर्चा की जाती है।
भारत में नियोजन का महत्व और सततपोषणीय विकास का परिचय
भारत में विकास के लिए नियोजन आवश्यक है। नियोजन से संसाधनों का सही उपयोग होता है और विकास संतुलित होता है। सततपोषणीय विकास का मतलब है विकास ऐसा जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रखे। कक्षा 12 के भूगोल में यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें समझाता है कि कैसे भारत अपने विकास को पर्यावरण के साथ संतुलित कर सकता है।
- नियोजन से विकास के लक्ष्यों का निर्धारण होता है।
- सततपोषणीय विकास में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय तीनों पहलुओं का समन्वय होता है।
- भारत में विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा दिया गया है।
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम: उद्देश्य और क्षेत्र
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79) में हुई। इसका उद्देश्य भारत के पिछड़े पर्वतीय क्षेत्रों का समग्र विकास करना था। इसमें उत्तराखण्ड के पर्वतीय जिले, असम की मिकिर पहाड़ी, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग जिला और तमिलनाडु के नीलगिरी जिले शामिल थे।
राष्ट्रीय पिछड़े क्षेत्रों पर समिति ने 1981 में 600 मीटर से ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों को पिछड़े क्षेत्र माना। इस कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:
- स्थानीय संसाधनों का विकास करना।
- जीविका आधारित अर्थव्यवस्था को निवेश-उन्मुख बनाना।
- पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखना।
- अंत:प्रादेशिक व्यापार में शोषण रोकना।
पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी, पशुपालन, मुग्गी पालन, वानिकी और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया गया। ये योजनाएं क्षेत्र की विशेष भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।
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सूखा संभावित क्षेत्र विकास योजना और इसकी भूमिका
सूखा संभावित क्षेत्र विकास योजना की शुरुआत चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) में हुई। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में विकास करना था जहाँ बार-बार सूखा आता है। यह योजना कृषि, जल संरक्षण, और ग्रामीण विकास पर केंद्रित थी।
मुख्य बिंदु:
- सूखा संभावित क्षेत्रों में फसल चक्र और जल प्रबंधन सुधारना।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना।
- मध्य प्रदेश जैसे कुछ बड़े राज्यों को सूखा संभावित क्षेत्रों में शामिल नहीं किया गया।
यह योजना भारत के सतत विकास प्रयासों का हिस्सा है, जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में मदद करती है।
नीति आयोग और योजना आयोग: नियोजन में बदलाव
भारत में नियोजन का काम पहले योजना आयोग संभालता था, जिसकी स्थापना 1950 में हुई थी। योजना आयोग ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से विकास के लक्ष्य तय किए। 2015 में नीति आयोग की स्थापना हुई, जिसने योजना आयोग की जगह ली।
नीति आयोग के बदलाव:
| पहलू | योजना आयोग | नीति आयोग |
|---|---|---|
| स्थापना वर्ष | 1950 | 2015 |
| कार्यक्षेत्र | पंचवर्षीय योजनाएं बनाना | नीति निर्माण, समन्वय, सुधार |
| लचीलापन | कम | अधिक |
नीति आयोग अधिक लचीला और समन्वयकारी है, जो सतत विकास और नियोजन में नई तकनीकों को अपनाता है।
सततपोषणीय विकास के सिद्धांत और भारत में उनका पालन
सततपोषणीय विकास का अर्थ है ऐसा विकास जो पर्यावरण की रक्षा करे और आर्थिक व सामाजिक विकास को संतुलित करे। ब्रंडटलैंड रिपोर्ट (1987) ने इस अवधारणा को लोकप्रिय बनाया। भारत में सतत विकास के लिए निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए गए हैं:
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
- प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण।
- सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
भारत सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन सिद्धांतों को लागू किया है, जैसे स्वच्छ भारत अभियान, जल संरक्षण परियोजनाएं और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना।
पर्वतीय क्षेत्र विकास में चुनौतियाँ और समाधान
पर्वतीय क्षेत्रों में विकास के दौरान कई चुनौतियाँ आती हैं:
- कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ।
- सीमित संसाधन और बुनियादी सुविधाओं की कमी।
- पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखना।
- स्थानीय जनसंख्या की आर्थिक स्थिति कमजोर होना।
समाधान:
- स्थानीय संसाधनों का सतत उपयोग।
- बागवानी, पशुपालन और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन।
- पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास योजनाएं।
- स्थानीय लोगों की भागीदारी और प्रशिक्षण।
इस प्रकार, पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम सतत विकास के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम कब शुरू हुआ था?
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79) में शुरू हुआ था।
सूखा संभावित क्षेत्र विकास योजना किस पंचवर्षीय योजना में शुरू हुई?
सूखा संभावित क्षेत्र विकास योजना चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) में शुरू हुई।
नीति आयोग की स्थापना कब हुई और इसका उद्देश्य क्या है?
नीति आयोग की स्थापना 2015 में हुई, इसका उद्देश्य नीति निर्माण, समन्वय और सुधार को बढ़ावा देना है।
सततपोषणीय विकास का क्या मतलब है?
सततपोषणीय विकास का मतलब है ऐसा विकास जो पर्यावरण की रक्षा करते हुए आर्थिक और सामाजिक विकास को संतुलित करे।
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम में किन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है?
इसमें बागवानी, पशुपालन, मुग्गी पालन, वानिकी और लघु ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाता है।
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